विवेक ने बताया कि हर गांव के बच्चों में काफी प्रतिभा है, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा को दिखाने का मंच नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया कि हर बच्चा 40 किलोमीटर का सफर तय करके स्टेडियम तक का सफर तय नहीं कर सकता है।
जेवर में खेल का कोई स्टेडियम नहीं होने के कारण वीरमपुर गांव में रहने वाले विवेक कुमार सूरजपुर स्थित मलकपुर स्टेडियम में रोजाना जूडो का अभ्यास करने के लिए जाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं होने के कारण वह लिफ्ट मांगकर स्टेडियम का रास्ता तय करते थे। उनकी कड़ी मेहनत और लगन ने उन्हें साईं हॉस्टल तक का सफर तय करा दिया है।
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विवेक कुमार ने बताया कि उनके पिता का देहांत हो जाने के बाद घर की हालत खराब हो गई। तीन भाई बहन को पालने की जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। उन्होंने खेलने के लिए जब कहा तो भाई से सहयोग तो किया, लेकिन अभ्यास के लिए पास में कोई स्टेडियम और कोच नहीं होने के कारण वह बेहतर नहीं कर पा रहे थे। लोगों ने बताया कि मलकपुर स्टेडियम में जूडो की अकादमी चलती है। वहां जाकर अभ्यास किया जा सकता है। जेवर से मलकपुर की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। 40 किलोमीटर तक कैसे रोजाना पहुंचा जाए उनकी समझ में नहीं आ रहा था।
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गांव के लोगों ने बताया कि बस से स्टेडियम पहुंचा जा सकता है, लेकिन परिवार की हालत खराब होने के कारण यह भी संभव नहीं हो पा रहा था। उन्होंने स्टेडियम पहुंचने के लिए कभी लिफ्ट का सहारा लिया तो कभी बस का सहारा लेकर परी चौक तक पहुंच जाते थे। परी चौक के बाद स्टेडियम तक पहुंचने के लिए वह हमेशा लिफ्ट लेकर जाते। कभी-कभी उन्हें लिफ्ट नहीं मिलती थी तो वह पैदल ही रास्ता तय कर लेते थे। विवेक के खेल के प्रति जुनून ने उन्हें साईं हॉस्टल तक पहुंचा दिया है। जहां उन्हें निशुल्क ट्रेनिंग के साथ रहने और खाने-पीने की व्यवस्था सरकार की ओर से की जाती है।
जूडो में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खेलना लक्ष्य
विवेक कुमार ने बताया कि देश व प्रदेश के लिए अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि कई बार वह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीत चुके है। स्टेडियम में जूडो कोच परवेज अली की मदद से उन्होंने यहां तक का सफर तय किया है।
गांव के बच्चों के लिए भी ही स्टेडियम की व्यवस्था
विवेक ने बताया कि हर गांव के बच्चों में काफी प्रतिभा है, लेकिन उन्हें अपनी प्रतिभा को दिखाने का मंच नहीं मिल पाता है। उन्होंने बताया कि हर बच्चा 40 किलोमीटर का सफर तय करके स्टेडियम तक का सफर तय नहीं कर सकता है। यदि जेवर में मलकपुर की तरफ खेल का मैदान बन जाए तो जिले के कई खिलाड़ी प्रदेश का नाम रोशन कर सकते हैं।