नर्सरी विशेषज्ञ सुुमित वोहरा के मुताबिक पश्चिम विहार स्थित इंद्रप्रस्थ स्कूल ने अपने आवेदन पत्र में बच्चे का आधार कार्ड पहचान पत्र के रूप में मांगा है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे के आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में मांगने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। स्कूल बच्चे का आधार कार्ड मांगने की बजाय डीओई द्वारा तय क्राइटीरिया के तहत अन्य छह दस्तावेज में से कोई चुन सकते हैं।
इसके अलावा द्वारका स्थित अभिनव ग्लोबल स्कूल नर्सरी दाखिला आवेदन पत्र में अभिभावक से धर्म की जानकारी मांग रहा है। कोई भी स्कूल धर्म के आधार पर किसी बच्चे को दाखिला देने या नहीं देने का फैसला नहीं कर सकता है। अभिनव स्कूल आवेदन पत्र में अभिभावक के कार्यालय का वेरिफिकेशन, वेतन, पद आदि की जानकारी भी ले रहा है जबकि इस पर भी डीओई की रोक है। उधर, रोहिणी स्थित सेंट ऐंजल स्कूल नर्सरी दाखिला आवेदन पत्र में अभिभावक का प्रोफेशन, वेतन आदि की पूरी जानकारी मांग रहा है। इस पर भी अदालत व डीओई ने रोक लगा रखी है।
नर्सरी दाखिला विशेषज्ञ सुमित वोहरा का कहना है कि जब स्कूल ऑनलाइन आवेदन पत्र में सुप्रीम कोर्ट से लेकर डीओई के तय नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं तो इनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हम डीओई से मांग करते हैं कि जिन 53 स्कूलों ने अभी तक ऑनलाइन क्राइटिरिया साझा नहीं किया है, उनके नाम दाखिला सूची से हटाए जाएं। इसके अलावा नियमों के उल्लंघन पर संबंधित स्कूलों पर कार्रवाई भी करें।
निवास स्थान के लिए मान्य दस्तावेज
अभिभावक का राशन कार्ड।
बच्चे व अभिभावक के नाम का मूल निवासी प्रमाणपत्र।
अभिभावक का वोटर आई कार्ड।
बिजली, टेलीफोन, पानी का बिल।
बच्चे का पासपोर्ट।