ममता बताती हैं कि परिवार विनायक को हमेशा प्रोत्साहित करता था, लेकिन खुद विनायक का आत्मविश्वास उन्हें भी हैरान कर देते थे। वे मानते थे कि वे टॉपर्स में शामिल होंगे। जिन तीन परीक्षाओं में वह शामिल हुआ, उसका परिणाम इस आत्मविश्वास को सही बताता है।
परीक्षा के बाद कन्याकुमारी-रामेश्वरम घूमना था उसे, परिवार ने पूरा किया सपना
विनायक ने परीक्षा के बाद कन्याकुमारी के निकट रामेश्वरम मंदिर घूमने का प्लान बनाया था। इसके लिए पहले से तैयारी की थी। ममता ने बताया कि भले ही विनायक अब नहीं हैं, लेकिन वे खुद मंदिर पहुंच रहे हैं और उसका सपना पूरा कर रहे हैं। वे मंगलवार शाम ही रामेश्वरम पहुंचे।
वह इच्छाशक्ति हमारी ताकत
ममता बताती हैं कि उनके परिवार में विनायक की इच्छाशक्ति सभी की ताकत थी। उसकी बहन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में पढ़ चुकी हैं और ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही हैं। वहीं विनायक के पिता जीएमआर में उपाध्यक्ष हैं। ममता खुद होममेकर हैं। वे बताती हैं कि उन्हाेंने खुद होम मेकर बने रहना चुना। वे अपना सारा समय विनायक को देती थीं, उसे ब्रश कराने से लेकर खाना खिलाने तक की जिम्मेदारी उन्हाेंने अपने हाथ में ले रखी थी।