अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। विधानसभा अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने देशभर की विधानसभाओं में प्रक्रिया और कार्य संचालन के समान मॉडल नियम लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि तेजी से डिजिटल हो रही विधायी व्यवस्था और प्रौद्योगिकी आधारित शासन प्रणाली के इस दौर में प्रक्रियात्मक एकरूपता अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि संस्थागत आवश्यकता बन चुकी है। इससे लोकतांत्रिक जवाबदेही, पारदर्शिता और कार्यकुशलता को मजबूती मिलेगी।
कर्नाटक के मैसूर में आयोजित विधायी निकायों के लिए प्रक्रिया एवं कार्य संचालन के समान मॉडल नियम तैयार करने संबंधी पीठासीन अधिकारियों की समिति की बैठक में भाग लेने गए हैं। विजेन्द्र गुप्ता ने कहा कि समन्वित नियम देशभर की विधानसभाओं के कार्य संचालन में एकरूपता लाने के साथ प्रक्रियागत अस्पष्टताओं को भी कम करेंगे। संविधान का अनुच्छेद 118 और 208 संसद तथा राज्य विधानसभाओं को अपने नियम बनाने का अधिकार देता है। वहीं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली शासन अधिनियम की धारा 33 के तहत दिल्ली विधानसभा के नियम लोकसभा की प्रक्रिया के अनुरूप बनाए जाने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि अधिकांश राज्य विधानसभाएं पहले से ही लोकसभा के नियमों का व्यापक रूप से अनुसरण करती रही हैं, लेकिन स्थानीय जरूरतों के अनुसार उनमें बदलाव भी किए गए हैं। समय की मांग है कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल दस्तावेजीकरण और राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन जैसी व्यवस्थाओं के अनुरूप नियमों में समन्वय स्थापित किया जाए।