यह जानकार आपको हैरानी हो सकती है कि जो सब्जी मंडियों में 25 से 30 रुपये किलो मिलती है, वह आपकी रसोई तक पहुंचते-पहुंचते 50 से 60 रुपये किलो तक हो जाती है। सब्जियों के थोक और खुदरा दरों में इस समय दोगुने से ज्यादा का अंतर है। इस फर्क का खामियाजा लोगों को अपनी जेब ढीली कर चुकाना पड़ रहा है।
खासतौर से इसलिए भी कि कोरोना संकट और बारिश की वजह से आपूर्ति कम है, जिससे मंडी में भी सब्जियों की कीमतें पहले से ही ज्यादा हैं।
सब्जियों के दाम में वृद्धि होने से जहां इलाके व गुणवत्ता के हिसाब से कालोनियों में आलू 30 से 50 रुपये किलो मिल रहा है वहीं, टमाटर की कीमत भी 50 से 60 रुपये प्रति किलो है। इनमें सबसे अधिक दाम मटर और धनिया के हैं। मटर 120 से 140 रुपये किलो और धनिया 200 रुपये किलो तक है। दूसरी सब्जियों की कीमतें भी कमोवेश सामान्य दिनों से बहुत ज्यादा हैं।
आजादपुर मंडी के थोक व्यापारी संदीप खंडेलवाल ने बताया कि बारिश के कारण अधिकतर किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। ऐसे में बची हुई फसल का दाम स्वयं ही बढ़ गया है। रही सही कसर कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन ने पूरी कर दी।
इन सभी कारणों की वजह से बाजार में सब्जियों की आवक कम हो गई है। इसका सीधा असर सब्जियों के दाम में वृद्धि के रूप में पड़ रहा है। सब्जियों का मूल्य पीछे से तय होकर आता है। हालांकि, फुटकर विक्रेता कालोनियों में पहुंचते-पहुंचते सब्जियों के दाम मनमाना बढ़ा देते हैं।
पॉश कॉलोनियों में होता है ज्यादा फर्क
आजादपुर मंडी के थोक व्यापारी जसराज ने बताया कि बड़ी मंडियों से सब्जियां निकलने के बाद छोटी मंडी में पहुंचती हैं। यहां से कॉलोनी में सब्जी बेचने वाले फुटकर विक्रेता कॉलोनी के अनुसार सब्जी के रेट तय करते हैं। जितनी पॉश कॉलोनी होती है, उतना ही वहां दाम में वृद्धि होती है।
कई बार सब्जियों के दाम में अन्य कॉलोनियों के मुकाबले पॉश कॉलोनी में 50 रुपये तक का अंतर देखने को मिलता है। यही वजह है कि जो आलू बाकी कॉलोनियों में 30 से 35 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा होता है वही, पॉश कॉलोनियों में 45 से 55 रुपये किलो तक में आसानी से बिक जाता है।