फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अवमानना कार्यवाही में प्रशासनिक फैसले की वैधता की जांच नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
-याचिका में आरोप लगाया गया था कि एनसीटीई ने अदालत के पुराने आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं किया
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी अदालत के आदेश का पालन करते हुए सरकारी अथॉरिटी की ओर से लिए गए प्रशासनिक फैसले की वैधता या उसके सही-गलत होने की जांच अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्यवाही में नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि जब संबंधित प्राधिकरण न्यायालय के निर्देशानुसार निर्णय ले लेता है, तो अवमानना कार्यवाही का दायरा वहीं समाप्त हो जाता है।
न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने एक कॉलेज की ओर से दायर अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) ने अदालत के पूर्व आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं किया और कॉलेज के बीएड परिसर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने संबंधी आवेदन पर वर्षों तक निर्णय नहीं लिया।
विज्ञापन

याचिकाकर्ता कॉलेज के अनुसार, उसे वर्ष 2005 में एनसीटीई से प्रति वर्ष 100 छात्रों के साथ बीएड पाठ्यक्रम संचालित करने की मान्यता मिली थी। इसके बाद कॉलेज ने वर्ष 2007 और 2013 में अपने परिसर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की अनुमति के लिए आवेदन किया था। कॉलेज का आरोप था कि लंबे समय तक आवेदन लंबित रखा गया, जिससे उसे हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गत 29 जनवरी को एनसीटीई को निर्देश दिया था कि वह छह सप्ताह के भीतर कॉलेज के आवेदन पर निर्णय ले। तय समयसीमा के भीतर फैसला नहीं होने पर कॉलेज ने अवमानना याचिका दायर की और कहा कि अदालत के बार-बार निर्देशों के बावजूद आवेदन पर कार्रवाई नहीं की गई।

कॉलेज ने यह भी तर्क दिया कि एनसीटीई ने 2 जून को परिसर परिवर्तन के अनुरोध को खारिज करते हुए जो आदेश पारित किया, वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं था। कॉलेज का कहना था कि प्रस्तावित परिसर का निरीक्षण किए बिना ही आवेदन खारिज कर दिया गया।
विज्ञापन

अदालत के आदेश की कोई जानबूझकर अवहेलना नहीं हुई: एनसीटीई
एनसीटीई ने अदालत को बताया कि कारण बताओ नोटिस जारी करने, कॉलेज के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद 2 जून को आवेदन पर निर्णय लिया गया था। परिषद ने कहा कि अदालत के आदेश का पालन किया गया है और किसी प्रकार की जानबूझकर अवहेलना नहीं हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही का उद्देश्य केवल यह देखना है कि अदालत के आदेश का पालन हुआ है या नहीं। यदि संबंधित अथॉरिटी आदेश के अनुरूप निर्णय ले चुकी है, तो उस निर्णय की वैधता या गुण-दोष की समीक्षा कंटेम्प्ट कार्यवाही में नहीं की जा सकती। अदालत ने माना कि एनसीटीई ने 2 जून को आवेदन पर निर्णय ले लिया था। इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि अवमानना का मामला आगे नहीं बढ़ता और याचिका का निपटारा कर दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें