कैनवास पर कूंची चलाते-चलाते राजस्थान के नंदू शर्मा ने बेलारूस की एक बाला पर यहां की ललित कलाओं की ऐसी छाप छोड़ी कि वह न सिर्फ उनकी पत्नी बनी, बल्कि यहां की कला को भी अपने अंदर उतार लिया। इन दोनों का प्यार कला की डोर से ही बंधा है।
इनका नाम है नताली बोगुसेविच। इस समय उदयपुर (राजस्थान) में रह रहीं बोगुसेविच ने अपनी बनाई पेंटिंग मेले में पति के स्टॉल पर प्रदर्शित की हैं। उन पर भारतीय पेंटिंग का नशा ऐसा चढ़ा कि उन्होंने पहले राजस्थान के किलों का स्केच बनाया।
इसके बाद दिल्ली के लाल किला, जामा मस्जिद, इंडिया गेट और कुतुब मीनार जैसी ऐतिहासिक इमारतों की सीरीज कैनवास पर उकेरी। सैन फ्रांसिस्को, लॉस एंजलिस, लंदन, काहिरा, टोकियो और पेरिस में जाकर सन राइजिंग पेंटिंग श्रृंखला बनाई।
नंदू शर्मा के मुताबिक, बोगुसेविच के पिता मिन्क्स यूनिवर्सिटी बेलारूस में इंडियन आर्ट एंड हिस्ट्री के प्रोफेसर हैं। इसी वजह से उन्हें भारत के प्रति लगाव पैदा हुआ और वह 2009 में ‘कलाक्षेत्र’ चेन्नई आ गईं। वहां पर वह भरतनाट्यम सीख रही थीं और नंदू शर्मा ने पेंटिंग एग्जीबिशन लगा रखी थी।
यहां बोगुसेविच के थिरकते पांवों और नंदू शर्मा के रंगों व कूंची के साथ कैनवास पर चलती अंगुलियों का मिलन हुआ। इसके बाद वह यहीं की बनकर रह गईं। वर्ष 2012 में इन दोनों की भारतीय रीति रिवाज से शादी हो गई।
नंदू बताते हैं कि विपरीत कल्चर से आने के बाद बोगुसेविच ने इंडियन आर्ट एंड कल्चर में डिप्लोमा किया। शादी होने के बाद भारतीय सोसायटी को समझने के लिए उन्होंने यहां के साहित्य पढ़े। अब वह पति के लिए न सिर्फ करवा चौथ का व्रत रखती हैं, बल्कि होली, दिवाली सहित हर उत्सव का आनंद लेती हैं।