नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक तीखे अंतरराष्ट्रीय हिरासत विवाद में बच्ची को भारत में ही रहने का फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि अमेरिका में जन्मी 11 वर्षीय लड़की की भारत में चार वर्ष की पढ़ाई और बसावट ने यहां उसकी ‘गहरी जड़ें’ जमा दी हैं, जो अमेरिकी सुपीरियर कोर्ट के संयुक्त पालन-पोषण आदेशों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।
अदालत ने दोनों भारतीय नागरिक माता-पिता की याचिकाएं खारिज कर दीं और बच्ची के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसे भारत में अपनी मां के साथ रहने की अनुमति दी। न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि विदेशी अदालतों के आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए, लेकिन वे बाध्यकारी नहीं हैं, खासकर जब वे बच्ची की स्थिरता और स्थापित जीवन से टकराते हों। माता-पिता दोनों भारतीय नागरिक हैं। बच्ची अमेरिका में पैदा हुई, इसलिए वहां की नागरिक है। 2022 में मां बच्ची को लेकर भारत लौट आईं। पिता ने अमेरिकी अदालत में संयुक्त हिरासत का आदेश प्राप्त किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में दोनों पक्षों ने याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने पाया कि बच्ची ने भारत में स्कूल में चार साल बिताए हैं, यहां उसकी जिंदगी स्थिर हो गई है और उसके दोस्त-रिश्तेदार सब यहीं हैं। पीठ ने कहा, बच्ची की भलाई परम महत्व की है। विदेशी आदेश केवल सलाहकारी मूल्य रखते हैं, लेकिन जब वे बच्ची की स्थिरता से टकराते हैं तो भारतीय अदालत बच्ची के हित में फैसला ले सकती है।