सड़क दुर्घटना में घायल दो युवकों की जान बचाना एचआर मैनेजर को भारी पड़ गया। उन्होंने घायलों को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। आरोप है कि मौके पर पहुंची पुलिस ने मददगार पर ही दुर्घटना करने का आरोप लगाकर हिरासत में ले लिया।
समझौते के नाम पर पुलिस ने 10 हजार रुपये दोनों युवकों के घरवालों को दिलवा दिए गए। आरोप यह भी है कि पुलिस ने भी समझौता कराने के लिए 2,000 रुपये ले लिए।
एसपी सिटी दिनेश यादव ने मामले की जांच के आदेश डीएसपी अरविंद यादव को दे दी है। सूरजपुर निवासी योगेंद्र और तरुण फेज-2 स्थित प्रिंटिंग प्रेस में काम करते हैं।
मदद करना पड़ गया भारी
रविवार दोपहर दोनों करीब 1 बजे बाइक से सूरजपुर जा रहे थे। दोनों हेलमेट नहीं पहने थे। डीएससी रोड पर बाइक को स्विफ्ट कार ने टक्कर मार दी। जिससे दोनों गिरकर बेहोश हो गए।
स्विफ्ट के पीछे अल्टो कार में एचआर मैनेजर रितेश गुप्ता आ रहे थे। रितेश ने बताया कि उन्होंने दोनों को बेहोश देखकर कार रोक ली। वह दोनों को कार में लेकर यथार्थ अस्पताल पहुंचे और एडमिट करा दिया।
इसी बीच अस्पताल में फेज-2 पुलिस आई और रितेश को ही हिरासत में ले लिया। पुलिसकर्मियों ने उन्हीं पर दुर्घटना करने का आरोप लगाया थाने ले आई।
और तो और समझौता कराने के लिए ले लिए 2000
एचआर मैनेजर का कहना है कि उनकी एक नहीं सुनी गई। रितेश का आरोप है कि रात 1 बजे घर वाले आए तो पुलिस ने घायलों को 10 हजार रुपये दिलवाए।
साथ ही पुलिस वालों ने समझौता कराने के नाम पर 2,000 ले लिए। मीडिया की जानकारी में आने के बाद एसपी सिटी ने मामले की जांच के आदेश दे दिए।
एचआर मैनेजर ने रविवार दोपहर हादसे में घायल दो लोगों को भर्ती कराया था। इस मामले में समझौता कराने के लिए पुलिस पर रुपये लेने का भी आरोप लगा।