उत्तर प्रदेश पुलिस का एक सिपाही को भ्रटाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने पर सजा दी जा रही है। उसे अरविंद केजरीवाल की जनसभाओं में जाते रहने की वजह से कई बार ट्रांसफर तो कई बात वेतन में कटौती तक की सजा दी जा रही है।
इस सिपाही का नाम सुशील कौशिक है, जो फिलहाल एसएसपी कार्यालय के शिकायत प्रकोष्ठ में तैनात है। इस लड़ाई की शुरुआत 2011 में तब हुई, जब सुशील कौशिक बागपत में तैनात थे और आप की स्वराज यात्रा के दौरान उन्होंने सुर्खियां बटोरीं।
लिहाजा, पुलिस उप महानिरीक्षक ने साल भर तक उन्हें न्यूनतम वेतनमान दिए जाने की सजा सुनाई। इसके खिलाफ सिपाही सुशील ने आईजी बरेली जोन के सामने अपील की, लेकिन वह खारिज हो गई।
सिपाही ने भेजा एडीजी को कानूनी नोटिस
आईजी के पास से अपील खारीज होने के बाद सुशील ने जुलाई 2013 में उन्होंने रिवीजन याचिका लगाई, जो डीआईजी मेरठ को भेजी गई। यहां से याचिका एडीजी प्रशिक्षण तक पहुंची।
करीब महीना भर बीतने के बाद भी जब फैसला नहीं हुआ, तो पिछले महीने सुशील ने एडीजी को नोटिस भेजा। नोटिस में जवाब देने के लिए 15 दिन का समय और कोर्ट जाने की चेतावनी थी।
जिसके बाद एडीजी ने याचिका की सुनवाई का आश्वासन दिया और देरी होने की जांच का भी। लेकिन, साथ ही सुशील कौशिक की प्रारंभिक जांच के आदेश भी जारी कर दिए।
महकमे में मचा दिया हड़कंप
इस सिपाही ने अधिकारों की रक्षा के लिए महकमे के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया है। इतना ही नहीं, सजा के विरोध में इस सिपाही ने एडीजी को ही कानूनी नोटिस भेज दिया। इस कदम के बाद नोएडा से राजधानी लखनऊ तक अधिकारियों में हड़कंप मचा है।
महकमे ने इस आदेश पर तुरत-फुरत अमल किया। मंगलवार को सिपाही का बयान भी दर्ज हुआ। उधर, सिपाही ने भी आरटीआई डालकर एडीजी के ऊपर सवालों की बौछार कर दी है।
केंद्र और राज्य सभी से शिकायत की तैयारी
सुशील कौशिक ने अपनी शिकायत राष्ट्रपति, प्रमुख सचिव कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, कैबिनेट सचिव भारत सरकार, गृह सचिव भारत सरकार, राज्यपाल, प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश को भेजने की तैयारी कर ली है।
कौशिक ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने और पुलिस रीफॉर्म के लिए पेंशन पर जाने का इरादा बनाया था। एसएसपी के समक्ष अर्जी भी लगाई थी, लेकिन रिवीजन याचिका लंबित होने के कारण इरादा बदल दिया।