फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यादव सिंह को CBI से बचाने को SC गई सरकार

विज्ञापन
विज्ञापन
नोएडा अथॉरिटी केपूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह पर कसते शिकंजे के बीच इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
विज्ञापन


सरकार की दलील है कि आदेश देने से पहले उच्च न्यायालय ने उनकी सिफारिशों को नजरअंदाज कर दिया। हालांकि सीबीआई ने अपनी जांच में और तेजी लाते हुए बुधवार को करीब नौ घंटे तक यादव सिंह के नोएडा सेक्टर-51 स्थिति बंगले की छानबीन की।

सुबह करीब 11 बजे पहुंची टीम रात को 8 बजे वहां से रवाना हुई। इस बंगले पर सील लगी हुई थी, जिसे यादव सिंह की पत्नी कुसुमलता, बेटी गरिमा, बहू और पोते के सामने खोला गया।
विज्ञापन


एजेंसी ने छानबीन के बारे में कोई भी जानकारी देने से इंकार कर दिया। हालांकि बताया जाता है कि उन्होंने घर में रखे सामान का वैल्यूएशन किया और कुछ दस्तावेज लेकर चली गई।

हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के लिए दायर की याचिका

इस बीच बुधवार को नोएडा अथॉरिटी ने भी यादव सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार व सरकारी दस्तावेज गायब करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करा दी है। उसके कई ठिकानों पर हुई छापेमारी में भारी मात्रा में जेवर और नगदी के अलावा प्राधिकरण के गोपनीय दस्तावेज भी मिले थे।

राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के सीबीआई जांच वाले आदेश पर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राज्य से भी सहमति जरूरी है।

केंद्र केदो पत्रों के आधार पर उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया। पहले से ही इस मामले की न्यायिक जांच हो रही थी, बावजूद इसके मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
विज्ञापन

हाइकोर्ट के आदेश पर हो रही है जांच

मालूम हो कि गत 16 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस दलील को नकार दिया था कि पहले ही मामले की न्यायिक जांच चल रही है, ऐसे में सीबीआई जांच की जरूरत क्या है।

पिछले साल यादव सिंह के कई ठिकानों पर आयकर विभाग के छापे में नकदी, जेवर समेत अकूत संपत्ति मिली थी। बाद में उसेे निलंबित करते हुए मामले की जांच के लिए जस्टिस एएन वर्मा कमीशन का गठन किया।

इसी दौरान नूतन ठाकुर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सीबीआई जांच की गुहार की। याचिका में कहा गया था कि इसका दायरा बहुत बड़ा है, इसलिए इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए,जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें