अगर सबकुछ योजना के मुताबिक चला तो भविष्य में नोएडा की जमीन पर भी सीएम का दरबार सजेगा।
नोएडा प्राधिकरण ने राज्य अतिथि गृह और मिनी सचिवालय (स्थानिक आयुक्त कार्यालय) बनाने के लिए 20 हजार वर्ग मीटर जमीन शासन को दे दी है। इसकी कीमत करीब तीन अरब रुपये है।
शासन से हां का इंतजार है। इस हां के बाद लखनऊ के अलावा सीएम के बैठने का एक ठिकाना नोएडा भी होगा। इस स्थिति में नोएडा, ग्रेनो और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास से जुड़े फैसलों के लिए लखनऊ की दौड़ खत्म होगी।
यहां होगा मिनी सचिवालय
गाजियाबाद, बुलंदशहर, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर आदि जिलों के लिए ये मिनी सचिवालय विकास, राजनीति और हर दृष्टिकोण से अहम होगा। करीब साल भर पहले प्राधिकरण से 30 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन मांगी गई थी।
प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे स्थित सेक्टर 93 बी में 20 हजार वर्ग मीटर जमीन उपलब्ध कराई है। इससे ज्यादा जमीन देने में असमर्थता जताते हुए प्राधिकरण ने इस वाणिज्यिक भूखंड का विवरण भेज दिया है। प्राधिकरण का कहना है कि अतिथि गृह वाणिज्यिक श्रेणी में आते हैं और इसलिए इसका निर्माण वाणिज्यिक भूखंड पर ही हो सकता है।
रिजर्व प्राइस के आधार पर जमीन की कीमत 3.18 अरब रुपये हो रही है। अब शासन से जवाब का इंतजार है। पिछले साल प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में अतिथि गृह बनाने को मंजूरी दी गई थी।
तो अब लखनऊ जाने की झंझट खत्म
नोएडा में अतिथि गृह और मिनी सचिवालय बनने से जहां वीआईपी के ठहरने का इंतजाम होगा, वहीं नीतिगत फैसलों में भी आसानी होगी। नोएडा ग्रेनो व पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े मसलों पर लखनऊ तक दौड़भाग करने की जरूरत भी खत्म होगी।
नोएडा-ग्रेनो एक्सप्रेसवे आने वाले दिनों में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे का केंद्र बनेगा और प्रदेश में चमकेगा। यहां मेट्रो कनेक्टिविटी होगी और सेक्टर 144 में अंतरराज्यीय बस अड्डा भी बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा सेक्टर 96 में प्राधिकरण का दफ्तर भी प्रस्तावित है।
नोएडा के ओएसडी मनोज राय ने बताया कि अतिथि गृह के लिए जमीन उपलब्ध करा दी गई है। रिजर्व प्राइस के आधार पर तय रकम का विवरण भी भेजा गया है। आगे का निर्णय शासन खुद करेगा।
मिनी सचिवालय से ये होगा लाभ
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास व अन्य मुद्दों से जुड़े जो फैसले लखनऊ में होते हैं, उन पर मिनी सचिवालय में विचार हो सकेगा। मुख्यमंत्री, मंत्री और आला अधिकारियों के रुकने के लिए दिल्ली के अलावा नोएडा भी ठिकाना होगा। वीआईपी की आवाजाही रहेगी।
नोएडा से लेकर आगरा तक प्राधिकरण जमीन अधिग्रहण कर रहा है। ऐसे में किसानों से जुड़ी समस्याएं भी यहीं सुलझाई जाएंगी। पश्चिमी यूपी में औद्योगिक वातावरण तैयार करने में मिनी सचिवालय मददगार होगा। बड़े उद्योगपतियों की लखनऊ दौड़ खत्म होगी।
नोएडा-ग्रेनो समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश सुरक्षा व्यवस्था जैसे अहम मुद्दे पर मिनी सचिवालय में ही बनाई जा सकेगी योजनाएं। मिनी सचिवालय बनने के बाद राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यूपी का शो विंडो कहलाने वाला नोएडा अहम हो जाएगा।