बुलंदशहर में मतदान करने पहुंचे मतदाता
- फोटो : अमर उजाला
बुलंदशहर की सदर सीट पर हो रहे उपचुनाव में मंगलवार सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक कुल 11 घंटे में 18 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला जनता कर चुकी है, जो कि अब इवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) में कैद हो गया है।
जिसका फैसला आगामी 10 नवंबर को काउंटिंग के बाद आएगा। वहीं, भाजपा के बीते विभिन्न उपचुनावों के आंकड़ों को देखें तो यह चुनाव जीतना भाजपा के लिए साख का विषय बन चुका है। मुख्यमंत्री से लेकर विभिन्न मंत्री प्रचार करने और वोट जुटाने आ चुके हैं।
गौरतलब है कि बीते सदर सीट पर उपचुनाव के लिए कुल 19 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। जबकि, एक प्रत्याशी ने नामांकन वापस ले लिया था। मैदान में कुल 18 प्रत्याशी ताल ठोंक रहे थे। घर घर जाकर वोट जुटाए जा रहे थे, तो वहीं भाजपा, रालोद, कांग्रेस, असपा और बसपा के लिए उनके प्रदेश स्तरीय नेताओं ने आकर प्रचार प्रसार किया था।
चुनाव की घोषणा होने के बाद से ही लोग चुनावी चर्चाओं के बाजार को गरम किए हुए थे। वहीं, प्रत्याशी भी अपनी जीत के दावे ठोंक रहे थे। लेकिन, मंगलवार को मतदान संपन्न होने के बाद सभी प्रत्याशियों की किस्मत इवीएम में कैद हो चुकी है। आगामी दस नवंबर को उनके भाग्य का फैसला भी सुना दिया जाएगा।
हालांकि, यह चुनाव एक मामले में भाजपा के लिए चुनौती रहा है। भाजपा के बीते उपचुनावों का आंकड़ा ज्यादा बेहतर नहीं रहा है। इस कारण सदर सीट पर हुए उपचुनाव को जीतने के लिए भाजपा ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बुलंदशहर पहुंचे और जनता से भाजपा को वोट देने की अपील की थी।
इसके अलावा विभिन्न मंत्री, संगठन के पदाधिकारी, वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रत्याशी को जितानें में जुटे हुए थे। अब देखना है कि इस बार भाजपा उपचुनाव के अपने आंकड़े को बेहतर कर पाएगी या नहीं। वहीं, दूसरी ओर रालोद प्रत्याशी के लिए वोट जुटाने रालोद मुखिया अजीत सिंह पहुंचे और खासतौर पर जाट समुदाय और किसानों को लुभाने की कोशिश की थी।
वहीं, असपा के चंद्रशेखर आजाद, कांग्रेस के लिए सचिन पायलट और बसपा के लिए शमशुद्दीन राईन अपने-अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए वोट जुटाने यहां पहुंचे थे। अब दस नवंबर को यह तय हो जाएगा कि किस प्रत्याशी और उसके लिए वोट मांगने आए नेताओं ने जनता को अपनी ओर लुभाया है।
कम वोट प्रतिशत से बढ़ी उम्मीदवारों की धड़कनें
गौरतलब है कि इस बार 18 प्रत्याशी चुनावी मैदान में खड़े हैं। जबकि, गत विधान सभा चुनाव में कुल सात प्रत्याशी ही मैदान में थे। वर्ष 2017 के चुनाव में कुल 64.27 प्रतिशत मतदान हुआ था और भाजपा के प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह सिरोही ने सर्वाधिक 111538 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की थी। वहीं, इस बार अधिक प्रत्याशियों की अधिक संख्या होने और मतदान प्रतिशत सिर्फ 52.56 प्रतिशत होने से आंकड़े बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इससे उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ने के साथ ही कम मत प्रतिशत की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है।
चर्चाओं का दौर, घनघनाते रहे फोन
मंगलवार को मतदान के दौरान सदर सीट के अलावा जनपद की विभिन्न छह विधानसभा सीटों पर चर्चाओं को बाजार गरम रहा। लोग सदर सीट पर हो रहे उपचुनाव की जानकारी के लिए अपने दोस्तों व नाते रिश्तेदारों से फोन पर संपर्क कर जानकारी लेते हुए भी नजर आए। साथ ही अपने-अपने आंकड़े लगाकर प्रत्याशियों की जीत हार के आंकड़े जुटा रहे थे।
एडीजी और आईजी ने किया दौरा
सदर सीट पर चुनाव के दौरान एडीजी राजीव सब्बरबाल और आईजी प्रवीण कुमार भी पहुंचे और मतदेय स्थलों का निरीक्षण किया। साथ ही अधीनस्थ अफसरों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए।