- 10 साल की जेल की सजा के निलंबन पर हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
- मामले में हाईकोर्ट ने सजा निलंबित कर दिया था, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगाया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उन्नाव दुष्कर्म मामले से जुड़ी पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के प्रकरण में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी 10 वर्षीय सजा को निलंबित करने और जमानत देने की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति रविंदर डूडेजा की एकल पीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता, इसके गहरे सामाजिक प्रभाव और सेंगर के गंभीर आपराधिक इतिहास को देखते हुए कोई राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने माना कि सेंगर ने अब तक लगभग 7.5 वर्ष जेल में बिताए हैं, लेकिन अपील में देरी का एक हिस्सा खुद याचिकाकर्ता द्वारा बार-बार विभिन्न अंतरिम याचिकाएं दाखिल करने के कारण हुआ है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अपराध की गंभीर प्रकृति और इसके सामाजिक प्रभाव को देखते हुए कोई नई या परिवर्तनकारी परिस्थिति सामने नहीं आई हैं, जिसके आधार पर सजा निलंबन दिया जा सके। कोर्ट ने अपील को जल्द से जल्द मेरिट पर सुनवाई के लिए तीन फरवरी को सूचीबद्ध कर दिया है। यह मामला 2017 के उन्नाव रेप कांड से जुड़ा है, जिसमें पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 13 मार्च 2020 को कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की हिरासत में मौत के मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। हाल ही में दिसंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर जमानत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगा दी थी। वर्तमान याचिका हिरासत में मौत के अलग मामले से संबंधित हैं, जिसमें सजा निलंबन की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि कोई आधार नहीं बनता जिससे राहत दी जा सके।