केंद्रीय शिक्षा व कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार देश का पहला नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क का मसौदा जारी किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विद, शिक्षक, आम लोग 30 नवंबर तक सुझाव भेज सकते हैं।
देश में अब स्कूल, उच्च शिक्षा, कौशल विकास का एकीकृत नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) होगा। पहली कक्षा से लेकर पीएचडी और कौशल विकास के तहत अपने ज्ञान व अनुभव को जोड़ने पर उसके क्रेडिट मिलेंगे। अभी तक स्कूली शिक्षा में कोई क्रेडिट फ्रेमवर्क नहीं था। पहली बार स्कूल,उच्च शिक्षा और कौशल विकास को एक साथ जोड़ा गया है।
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छात्र पढ़ाई के साथ स्पोर्ट्स, समाज सेवा, कौशल विकास, इंटर्नशिप, जॉब ट्रेनिंग, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट पर काम करता है तो उसे उसके क्रेडिट मिलेंगे, जोकि भविष्य में नौकरी में भी सहायक होंगे। खास बात यह है कि इस नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क में छात्रों के साथ कामकाजी युवाओं को भी लाभ होगा। यदि कोई नौकरी और अपना काम करने वाला युवा किसी क्षेत्र में खुद के नॉलेज को अपग्रेड करता है तो उसे भी मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट मिलेंगे। इसका उसे कामकाज और नौकरी में लाभ मिलेगा।
केंद्रीय शिक्षा व कौशल विकास मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार देश का पहला नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क का मसौदा जारी किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विद, शिक्षक, आम लोग 30 नवंबर तक सुझाव भेज सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह फ्रेमवर्क ढांचा-पठन-पाठन से जुड़े अकादमिक व व्यावसायिक कार्यक्रमों को जोड़ेगा और दोनों के बीच लचीली व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजादी के समय देश में 25 करोड़ व्यक्ति निरक्षर थी। आजादी के 75 वर्ष बाद भी आंकड़ा उतना ही है। इसलिए मेरा सुझाव है कि छठीं कक्षा से ऊपर का कोई भी छात्र अपने इलाके के एक व्यक्ति को प्रौद्योगिकी का प्रयोग करके साक्षर करें। इससे देश पूर्ण साक्षर हो जाएगा। मेरा राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क तैयार करने वाली कमेटी को सुझाव है कि यदि कोई छात्र इस जिम्मेदारी को लेता है तो उसे प्वाइंट 5 क्रेडिट का लाभ देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है। अगले 25 वर्षों में विकास भारत के दृष्टिकोण को पूरा करना है। इसलिए हमें अपनी 100फीसदी आबादी का साक्षर करना होगा।
ऐसे करेगा काम
जल्द ही हर छात्र को आधार की तर्ज दस अंकों का एक यूनिक नंबर मिलेगा। यह यूनिक नंबर अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट से जुड़ा होगा। पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक जो भी पढ़ाई, अतिरिक्त गतिविधियों में भाग लेता है तो उसका मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट उसके अकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में जुड़ते जाएंगे।
बाद में इसमें युवाओं को भी जोड़ा जाएगा, फिर चाहें वे नौकरी पेशा हो या फिर अपना कोई काम करने वाले। वे जो भी अपने ज्ञान और अनुभव को कौशल विकास से बढ़ाएंगे, उसका मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट मिलेगा, वह उनके क्रेडिट बैंक में जुड़ेंगे। भारत ही नहीं, दुनिया में कहीं से भी कोई अकेडमिक बैंक क्रेडिट के डिजी लॉकर्स से संबंधित छात्र और युवा का क्रेडिट स्कोर चैक कर सकेगा। यह उसे आगे नौकरी और काम में मददगार साबित होगा।
फायदाः अब सिर्फ पढ़ाई ही नौकरी और काम में जरूरी नहीं
अब सिर्फ किताबी पढ़ाई ही हमें अच्छी नौकरी और कामकाज में मदद नहीं करेगी। नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क से अब विषयों के किताबी ज्ञान के साथ-साथ कक्षा में पढ़ाई करवाना, लैब, इनोवेशन लैब, प्रोजेक्ट, असाइनमेंट, टयूटोरियल, स्पोर्ट्स, गेम्स, आर्ट, म्यूजिक, योगा, कारीगिरी, कम्यूनिटी वर्क, एनएसएस, एनसीसी, वाद-विवाद, क्लास टेस्ट, वोकेशनल व तकनीकी शिक्षा, ऑनलाइन या डिजिटल लर्निंग, इंटर्नशिपजॉब ट्रेनिंग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इसमें शामिल होने पर भी मूल्यांकन के आधार पर क्रेडिट मिलेंगे।
मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि अब लगातार पढ़ाई जरूरी नहीं है। यदि कोई छात्र या कोई भी युवा किसी कारण से स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पाता है तो भी मूल्यांकन के आधार पर दोबारा परीक्षा देकर 10वीं और 12वीं पास कर सकते हैं। ऐसे ही उच्च शिक्षा बीच में छोड़ने वाले कामकाजी युवा भी दोबारा से अपनी पढ़ाई पूरी कर सकते हैं। यानी शिक्षा में अब मल्टीपल एंट्री-एग्जिट की सुविधा मिलेगी। यदि कोई बीच में पढ़ाई छोड़ने के बाद दोबारा शुरू करता है तो क्रेडिट बैंक में पहले के क्रेडिट जमा होंगे। इससे उसे दोबारा पिछली पढ़ाई नहीं करनी होगी। मतलब जहां छोड़ी गयी होगी, वहां से आगे की शुरू कर सकता है। इसके अलावा छात्र अपनी सहुलियत के हिसाब से विश्वविद्यालय भी बदल( पोर्टेबल फैसिलिटी) सकेंगे।
ऐसा होगा नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क का लेवल
पहली बार शिक्षा में भी छात्रों का हर वर्ष लर्निंग आउटकम के आधार पर मूल्यांकन होगा। इसमें ज्ञान, कौशल, सक्षमता आधारित परीक्षा से मूल्यांकन होगा।
. पांचवीं कक्षा- एक क्रेडिट लेवल
. आठवीं कक्षा- दो क्रेडिट लेवल
. 10वीं कक्षा-तीन क्रेडिट लेवल
.12वीं कक्षा-चार क्रेडिट लेवल
. यूूजी-साढ़े चार से छह क्रेडिट लेवल
.पीजी- छह से सात क्रेडिट लेवल
. पीएचडी -आठ क्रेडिट लेवल
विदेशी छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा की पढ़ाई में नहीं होगी दिक्कत
विश्व में स्कॉटलैंड में उच्च शिक्षा का लर्निंग आउटकम आधारित क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क सबसे अधिक 12 है। इसके बाद आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंडमें यह लेवल 10 है। जबकि यूरोपीय देशों में उच्च शिक्षा का लेवल आठ है। अब यदि कोई छात्र विदेशी विश्वविद्यालय से ड्यूल डिग्री और ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए जाता है तो उसे अब दिक्कत नहीं होगी। इस नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के कारण भारतीय उच्च शिक्षा में भी क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क एक समान होगा। इसके अलावा भारतीय शिक्षण संस्थानों में भी छात्र पढ़ाई के बीच में किसी भी एरिया या कोर्स का विकल्प चुनते हैं तो उन्हें दिक्कत नहीं होगी।