केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने किया पुरावशेष गैलरी का उद्घाटन
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भारत के विभिन्न धार्मिक स्थलों से चोरी के बाद तस्करी के जरिये विदेशों में भेजे गए पुरावशेषों में से वापस लाई र्गइं प्राचीन प्रतिमाओं का दीदार अब दर्शक कर सकेंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से लंबी प्रक्रिया पूरी करने के बाद इन प्रतिमाओं को भारत वापस लाया जा सका है। इन पुरावशेषों को सुरक्षित रखने के लिए पुराने किले में बनाई गई गैलरी का केंद्रीय मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने उद्घाटन किया।
इस मौके पर केंद्रीय मंत्री पटेल ने कहा कि पुराने किले में बनाई गई गैलरी में जनता भारतीय विरासत से रूबरू हो सकेंगे। इन पुरावशेषों में भारतीय प्राचीन कला का इतिहास शामिल हैं, जिसे भारत लगभग खो चुका था। लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इन पुरावशेषों को भारत वापस लाकर धरोहरों का सम्मान बढ़ाया है।
इस दीर्घा में दर्शकों को चोल काल की पार्वती और श्रीदेवी की कांस्य प्रतिमाएं (वर्ष 2016 में वापस लाई गई), स्थानक बुद्ध (वर्ष 1999 में मेट्रोपालिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट द्वारा लौटाई गई), मौर्य काल की टेराकोटा मातृदेवी (वर्ष 2016 में वापस लाई गई), ब्रह्मा- ब्राह्मणी (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जब्त की गई), मिथुन (न्यूयार्क में जब्त की गई और वर्ष 2010 में वापस लाई गई) और कश्मीरी हारवान टाइल (वर्ष 2016 में भारत के कांसुलेट जनरल न्यूयार्क द्वारा भारत को वापस की गई) से रूबरू होने का मौका मिलेगा।
वहीं पुराना किला के मेहराबदार कक्षों में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा तैयार की गई गैलरी में जनता के समक्ष अधिग्रहीत और प्रत्यर्पित पुरावशेष प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि राष्ट्र की विरासत के गैरकानूनी व्यापार के प्रति उन्हें संवेदनशील बनाया जा सके। साथ ही प्रत्यर्पित और अधिग्रहीत पुरावशेष की व्यापक श्रृंखला में प्रस्तर और धातु की मूर्तियां, सिक्के, चित्रकारी, हाथी दांत और तांबे की कलाकृतियां, वास्तुविद पैनल आदि शामिल हैं। वर्तमान में केंद्रीय पुरावशेष संकलन में कुल 2,72,824 पुरावशेष हैं, जिनमें से 4,144 वापस लाए गए) पुरावशेष हैं।