सत्र 2012-13 में विकास योजनाओं में प्रदेश भर में अव्वल रहा गाजियाबाद इस बार विकास योजनाएं बनाने में ही पिछड़ गया।
गाजियाबाद सहित मेरठ मंडल के सभी जिले विकास योजना बनाने में पीछे हैं। एक साल पीछे की जिला योजनाएं जमीन पर नहीं उतर पाई हैं।
अक्तूबर 2014 को प्रमुख सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने जिलों की 2015-16 की जिला योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे। जनपद अधिकारियों को 31 दिसंबर तक जिला योजना को अंतिम रूप देकर शासन को भेजना था।
बावजूद इसके अब तक ग्राम पंचायत स्तर पर ही जिला योजना की बैठक पूरी नहीं हो सकी है। ऐसे में जनपद स्तर से रिपोर्ट भेजने का सवाल ही नहीं है।
यह हाल अकेले गाजियाबाद का ही नहीं है। इस कड़ी में बागपत, बुलंदशहर, हापुड़ जिले भी शामिल हैं।
कैसे बनती है जिला योजना
जिला योजना बनाने के लिए ब्लॉक स्तर पर जिला पंचायत की बैठक होती है। जिला पंचायत संसाधनों का आकलन कर विकास के प्रस्ताव जिला को भेजते हैं।
जिला स्तर पर जिला योजना के सदस्यों की बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है। इसके बाद जनपद के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में इन योजनाओं को पास कर शासन को भेजा जाता है।
नवंबर 2014 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी मंत्री आजम खां के नेतृत्व में इसकी बैठक हुई थी। अभी उसका काम ही पूरा नहीं हो पाया है।