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नदियों के किनारे नहीं बनेंगे विद्युत शवदाह गृह

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केंद्र सरकार नदी के किनारों से विद्युत शवदाह गृह खत्म करने जा रही है। इसकी जगह ऐसे शवदाह गृह बनेंगे, जिसमें लकड़ी का इस्तेमाल कम होगा। सरकार इसका मॉडल तैयार करवा रही है।
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इसकी जानकारी केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने दी। भारती मंगलवार को इंडिया हैबीटेट सेंटर में एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि गंगा और यमुना की अविरलता और निर्मलता तीन साल के भीतर दिखने लगेगी।

उमा भारती ने बताया कि आम लोग बड़ी श्रद्धा के साथ अपनों का अंतिम संस्कार करने नदियों के किनारे जाते हैं। इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यता काम करती है। लोगों की कोशिश पारंपरिक तरीके से अंतिम संस्कार करने की होती है। लेकिन विद्युत शवदाह गृहों से यह संभव नहीं होता।
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पूजा सामग्री को नदियों में फेंकना बड़ी समस्या नहीं

ऐसे में लोगों को शांति नहीं मिल पाती। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इसके मद्देनजर विद्युत शवदाह गृहों को खत्म करने का फैसला लिया गया है। वहीं, लकड़ी से चलने वाले शवदाह गृहों का एक मॉडल तैयार हो रहा है। इससे अंतिम संस्कार में लकड़ी का न्यूनतम इस्तेमाल होगा।

उमा भारती का मानना है कि पूजा सामग्री को नदियों में फेंकना बड़ी समस्या नहीं है। नदियों की सेहत के लिए बड़ी समस्या फैक्ट्रियों के प्रदूषक और सीवेज हैं। सरकार इस दिशा में काम कर रही है। कोशिश यही है कि नदी में शोधित/अशोधित पानी को गिरने से रोका जाए।

केंद्रीय मंत्री का दावा है कि गंगा-यमुना की सफाई के लिए हो रही कोशिशें तीन साल में दिखने लगेंगी। जबकि अगले सात साल इस काम में लगेंगे कि नदियां दोबारा प्रदूषित न होने पाएं। नदियों की अविरलता व निर्मलता का काम दस साल में पूरा हो जाएगा।
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