एससी और एसटी छात्रों की शिकायतों का निपटारे के लिए अब विश्वविद्यालयों में अलग से कमेटी बनानी होगी। शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ विश्वविद्यालय प्रशासन एससी-एसटी शिकायतों के लिए अलग से कमेटी गठित करेंगे। इसका मकसद ऐसी शिकायतों में पीड़ित पत्र को जल्द से जल्द न्याय दिलाना है।अभी तक शिकायत आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन कमेटी गठित करता है। इसके चलते कई बार न्याय मिलने में देरी होती है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग(यूजीसी)के सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से सभी विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों समेत राज्य के शिक्षा सचिवों को पत्र लिखा है। इसमें लिखा है कि सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को एससी और एसटी से जुड़े मामलों की जांच के लिए संस्थानों को कमेटी बनानी होगी। इसके अलावा ऐसे मामलों के लिए विश्वविद्यालयों को अपनी वेबसाइट के वेब पेज पर शिकायत पेज भी बनाना पड़ेगा।
इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे मामलों को लेकर संबंधित कमेटी के सदस्यों के मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी समेत नाम बताने होंगे। इसके अलावा एससी-एसटी मामलों में शिकायत के आधार पर किस प्रकार की सजा, जुर्माना आदि की भी जानकारी देनी होगी। किस प्रकार की शिकायत ऐसे नियमों के तहत सुनी जाएगी, इसके बारे में बताना पड़ेगा।
पीड़ित छात्र इसके माध्यम से अपनी शिकायत ऑनलाइन या मोबाइल फोन पर सीधे दर्ज करवा सकेंगे। इसमें विश्वविद्यालय प्रशासन को शिकायतों के निपटारे के लिए समय-सीमा भी तय करनी होगी।
यूजीसी यूनिवर्सिटी एक्टिविटी मॉनिटरिंग पोर्टल से जोडना होगा:
विश्वविद्यालयों को अपनी वेबसाइट पर छात्रों के लिए यूजीसी के यूनिवर्सिटी एक्टिविटी मॉनिटरिंग पोर्टल का लिंक भी शेयर करना होगा। इसका मकसद यूजीसी द्वारा हर विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसी शिकायतों की सीधा निगरानी करना होगा। क्योंकि इसी पोर्टल पर विश्वविद्यालय प्रशासन को कुल शिकायत, निपटारे आदि की जानकारी अपलोड करनी होगी, जोकि इस लिंक पर सिर्फ यूजीसी ही देख सकती है।