लेकिन ऐसा हुआ नहीं। 25 जनवरी को एक प्राइवेट अस्पताल ले जाने के बाद पता चला कि फ्रैक्चर पैर में नहीं था बल्कि उसका कूल्हा खिसक गया था। छह फरवरी को डॉक्टरों ने वहां ऑपरेशन कर कूल्हा तो अपनी जगह बिठा दिया, फिलहाल बच्ची को प्लाटर लगा है जो अगले दो महीने तक रहेगा।
लेकिन इसके बाद भी प्रियांशी कभी ठीक से चल पाएगी या नहीं इसमें संदेह है। सुरेंद्र ने इसे लेकर मुख्यमंत्री, अस्पताल निदेशक, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली महिला आयोग को शिकायत दे दी है।
चिकित्सा निदेशक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। हड्डी रोग विभाग से इसका जवाब मांगा गया है। जांच की रिपोर्ट आने में कुछ समय लग सकता है। अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।