स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने की कोशिश में हर साल करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन इस अभियान में दिन रात एक करने वाले सफाई कर्मचारियों की सुध नहीं ली जा रही है। बीमारियों से ग्रस्त होकर वह काल के गर्भ में समा रहे हैं। दरअसल, दक्षिणी नगर निगम में 48 घंटे में एक सफाई कर्मी की मौत होती है।
ह आंकड़े हम नहीं बल्कि निगम ने ही जारी किए हैं। निगम के मुताबिक बीते पांच साल में उसके 877 सफाई कर्मचारियों की मृत्यु हो चुकी है। हालांकि, इतनी संख्या में कर्मचारियों की मौत का कारण बताने की स्थिति में निगम नहीं है। लगातार हो रही मौतों के बाद भी निगम सजग नहीं है। उसने अब तक इनके कारणों की जांच नहीं करवाई है। इतना ही नहीं, नगर निगम ने सफाई कर्मचारियों के रूटीन स्वास्थ्य की जांच कराने की भी पहल नहीं की है। कर्मचारियों को धूल से बचाने के लिए मास्क भी नहीं दिए जा रहे है। जबकि कई बार सदन की बैठक में पार्षद यह मुद्दा उठा चुके है।