कश्मीर में आयी जल प्रलय में फंसे मुरादनगर के दो परिवार बुधवार को सकुशल घर लौट आए। कश्मीर में दोनों परिवारों ने तबाही और मौत का जो तांडव अपनी आंखों से देखा उसे बयान करते हुए भी उनकी आवाज कांप उठती हैं।
इन परिवारों की आंखों के सामने ही गाड़ियां, दुकानें, मकान, पेड़, आदमी सब पानी में बह गए। भूख और प्यास से बेहाल दोनों परिवार चार दिनों तक होटल में फंसे रहे और साथ गए बच्चे भी सहमे हुए हैं। वापस लौटे तो परिजनों को देख उनकी आंखें भी छलक उठीं।
मेन रोड कृष्णा कालोनी निवासी मनीष गर्ग अपनी पत्नी भावना, बेटी आशी(7)व बेटे यश(5) और विजयमंडी निवासी अंकुर बंसल अपनी पत्नी शिखा व बेटे इशांत(5) के साथ 3 सितंबर को जम्मू कश्मीर में घूमने गए थे।
अंकुर ने बताया कि तीन सितंबर को हवाई जहाज से जम्मू कश्मीर पहुंचे। वहां लाल चौक स्थित बहुमंजिला होटल में रुके थे। शाम को डल झील घूमने पहुंचे तो बारिश से झील का जलस्तर अचानक खतरनाक स्तर तक बढ़ गया।
स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने तुरंत ही डल झील खाली कराकर सभी पर्यटकों को होटल भेज दिया। आगे की योजना बना ही रहे थी कि भारी बारिश शुरू हो गई। कुछ ही वक्त में होटल के चारों तरफ पानी भर गया।
रात्रि में पानी के तेज बहाव की आवाज सुनकर ही रूह कांप उठी। गाड़ियां, मकान सब खिलौनों की तरह पानी के वेग में बह रहे थे। यह भयानक मंजर देख होटल में रुके लोगों में सांसें थम सी गईं।
चार दिन तक होटल में खाना नहीं मिलने पर बच्चे भूख से बिलबिला उठे। पानी कम होने पर 7 सितंबर की सुबह किसी तरह होटल से एयरपोर्ट के लिए निकले। लालचौक पर बना पुल पानी से ढक गया था। किसी तरह खुद हिम्मत बांधी और बच्चों को ढाढस देकर पुल पार किया।
आधे घंटे बाद ही पता चला कि पुल पानी में बह गया। अगर शाम तक रुकते तो वापस आना बहुत मुश्किल था। मुरादनगर में परिजनों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा था। परिवार सकुशल लौटा तो परिजनों ने बच्चों को सीने से लगा लिया और उनकी आंख से खुशी के आंसू झलक पडे़।
और भी कई परिवार हैं फंसे
जम्मू कश्मीर में आयी जल प्रलय में लाखों लोग फंसे हैं। गांव नेकपुर गांव निवासी लियाकत ने बताया कि उसका भाई इनाम कंपनी के किसी काम से जम्मू कश्मीर गया था। वह हरियाणा गुड़गांव स्थित एक कंपनी में काम करता है, जिससे संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिजन उसकी सलामती की दुआ मांग रहे है।
कश्मीरी छात्रों ने मांगी सलामती की दुआ
जम्मू कश्मीर में आयी जल प्रलय में वहां पर संचार व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। इसी वजह से मुरादनगर के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्र भी परिजनों की सलामती के लिए फिक्रमंद हैं।
दुहाई स्थित एचआरआईटी में जम्मू कश्मीर के करीब 95 छात्र अध्यनरत हैं। छात्र परिजनों की सलामती के लिए फिक्रमंद हैं।
कश्मीर के फूलगांव निवासी रमीज मजीद, मोहम्मद अब्बास निवासी अनतनाग, बसीर अहमद कुुपवाड़ा और बिलाल अहमद, अहसान किरमानी, गौहर अहमद, शाहिद, इरफान, मौमीन, अदल अहमद ने बताया कि बाढ़ में कश्मीर की संचार व्यवस्था ठप हो जाने से उनका अपने परिजनों से करीब सात दिनों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।
छात्र परिजनों को लेकर परेशान है। अपने गांवों का हाल जानने के लिए खबरिया चैनलों पर नजर जमाए हैं। कुछ छात्रों के पास खर्च के लिए पैसा भी नहीं बचा है।
कश्मीरी छात्रों ने परिवारों की सलामती के लिए खुदा से इबादत की है। इसके अलावा आरडी कालेज और आधुनिक इंस्टीट्यूट में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों ने अपने परिजनों की सलामती के लिए इबादत की है।