- सरकार ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई समझौता नहीं
- स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की पूर्व निदेशक और सीपीए के पूर्व प्रभारी पर हुई कार्रवाई
अमर उजाल ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने केंद्रीय खरीद एजेंसी (सीपीए) में दवा और चिकित्सा उपकरणों में वित्तीय अनियमितता पर स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की निदेशक रही डॉ. वत्सला अग्रवाल और सीपीए के पूर्व प्रभारी डॉ. विनोद कुमार रंगा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने मुकदमा भी दर्ज किया है। मामले में कथित तौर पर 650 करोड़ के घोटाले का आरोप है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। इसमें शामिल हर व्यक्ति की पहचान कर उसे कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सतर्कता शाखा द्वारा जारी आदेश के अनुसार महानिदेशालय की पूर्व निदेशक डॉ. वत्सला अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
आदेश में कहा गया कि दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से केंद्रीय सिविल सेवा के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए उन्हें निलंबित किया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय दिल्ली रहेगा और उन्हें सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के विशेष सचिव संजीव कुमार द्वारा उपराज्यपाल के निर्देश से आदेश जारी किया गया है।
सीपीए से 40 कर्मचारियों को पहले हटाया
इससे पहले सतर्कता विभाग की सीपीए में छापेमारी के बाद स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की निदेशक रही डॉ. वत्सला अग्रवाल को पद से हटा दिया गया था। सीपीए के पूर्व प्रभारी डॉ. विनोद कुमार रंगा सहित 40 कर्मचारियों को भी हटाया गया था। हालांकि डॉ. वत्सला अग्रवाल पद से हटाए जाने के विरोध में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण चली गई थी। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने दोबारा से आदेश जारी कर उन्हें जीटीबी अस्पताल में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए थे।