आज विश्व जल दिवस है। जल वो तत्व है जिसके बिना शायद जीवन की कल्पना भी अधूरी है। जल ही जीवन का आधार है।
लेकिन विकास के नाम पर हमारे जीवन का आधार सिमटता जा रहा है। हम सब ये बातें जानते हुए भी हजारों लीटर पानी बेवजह बर्बाद कर देते हैं।
पिछले दस सालों में भू जल स्तर में गिरावट के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। दस साल में गाजियाबाद सहित एनसीआर के भूजल स्तर में 50 से 70 फीट की गिरावट आई है।
धरातल पर तीन चौथाई पानी होने के बाद भी पीने योग्य पानी एक सीमित मात्रा में ही है। उस सीमित मात्रा के पानी का हम अंधाधुध दोहन कर रहे हैं।
नदी, तालाब और झरने लगभग खत्म हो चुके हैं। हिंडन और यमुना की स्थिति दयनीय है। शहरीकरण के नाम पर गाजियाबाद में रिकार्ड विकास हुआ है।
सड़कों और पार्कों का पथरीकरण कर दिया गया। पेड़ों की जड़ को भी कांक्रीट से ढक दिया गया है। बारिश का पानी धरती में वापस नहीं जा पा रहा है। नतीजतन भूजल गिर रहा है।
10 साल पहले गाजियाबाद का भूजल स्तर 60 और 62 फीट था लेकिन आज गाजियाबाद का भूजल स्तर 120 से लेकर 150 फीट तक है।
राज नगर जैसे पाश इलाके में 130 से 140 फीट पर अच्छा पानी आता है। कवि नगर में भी 120 और 130 फीट पर पानी मिलता है।
गाजियाबाद के सबसे विकसित क्षेत्र टीएचए की हालत और बुरी है। टीएचए में टीला मोड़ सहित कई इलाकों में 150 फीट पर पानी आता है। प्रदेश सरकार ने भूजल प्रबंधन, भूजल रिचार्ज एवं वर्षा जल संचयन के लिए समग्र नीति को लागू किया है लेकिन उसका भी प्रभाव देखने को नहीं मिल रहा है।
समाधान:
पानी का सरंक्षण की नीति प्रभावी हो।
आम लोग भी जल संरक्षण पर गंभीर हों।
बेवजह पानी बर्बाद न करें।
भूजल रीचार्ज को प्लांट लगाए जाएं।
अधिक से अधिक पौधरोपण किया जाए।
बेवजह पथरीकरण न करें।