एनआरएचएम घोटाले के मामले में डासना जेल में बंद आरोपी पति-पत्नी को रिहाई के आदेश के बावजूद रिहा न करना जेल अधीक्षक को भारी पड़ गया। विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने डासना जेल अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया है।
कोर्ट ने उनसे जवाब तलब किया है कि ‘क्यों न उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना का मामला दर्ज किया जाए?’ कोर्ट के इस सख्त रवैये के बाद मंगलवार शाम को जेल प्रशासन ने आरोपी दंपति को रिहा कर दिया।
एनआरएचएम घोटाला प्रकरण के दो मामलों में सीबीआई ने लखनऊ के कारोबारी दंपति निरुपमा पांडेय और ग्रिजेश पांडेय को भी आरोपी बनाया था। जयगणेश ट्रेडर्स नामक फर्म के मालिक इस दंपति को सीबीआई ने पिछले साल गिरफ्तार किया था। तभी से यह दंपति डासना जेल में बंद हैं।
नवंबर 2013 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस दंपति को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। 13 जनवरी को परिजनों ने हाईकोर्ट आदेश के साथ ही अपने जमानती और बेलबांड गाजियाबाद स्थित सीबीआई विशेष कोर्ट में पेश किए। एंटी करप्शन कोर्ट के प्रभारी अधिकारी डा. एके सिंह ने दोनों को एक-एक लाख के दो-दो जमानती पेश करने पर जमानत दे दी। सोमवार को ही उनका रिहाई के डॉक्यूमेंट डासना जेल भेज दिया गया।
मंगलवार को आरोपी दंपति के वकील पंकज शर्मा ने कोर्ट को बताया कि रिहाई के डॉक्यूमेंट भेजे जाने के बावजूद जेल प्रशासन ने उनके मुवक्किल को रिहा नहीं किया। इस बाबत जेल अधीक्षक ने यह आपत्ति लगाई है कि रिहाई डॉक्यूमेंट पर आरसी नंबर नहीं लिखा है।
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए जेल अधीक्षक डा. वीरेशराज शर्मा को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। बुधवार को जेल अधीक्षक कोर्ट में पेश होकर इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे। दूसरी ओर कोर्ट के सख्त रवैये के बाद मंगलवार शाम को आरोपी ग्रिजेश और निरुपमा पांडेय को जेल से रिहा कर दिया गया।