रेलवे स्टेशन के 600 मीटर एरिया को एक बार में साफ करने वाली ट्रैक क्लीनिंग मशीन का ट्रायल रेल अधिकारियों ने शुक्रवार को गाजियाबाद स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर किया।
मशीन ने डीजल इंजन के सहयोग से ट्रैक की सफाई का काम दोपहर 2.30 बजे शुरू किया। पूरे ट्रैक पर मशीन को दो बार दौड़ाया गया, लेकिन मशीन ने ट्रैक के आसपास पड़े कूड़े को 70 फीसदी ही साफ कर पाई, जबकि 30 फीसदी कूड़ा ट्रैक के बीच ही पड़ा रहा।
दो बार ट्रायल के बाद भी जब पूरी तरह सफाई नहीं हुई तो अधिकारियों ने 3.30 बजे मशीन को दिल्ली रवाना कर दिया।
एक घंटे बाधित रहा प्लेटफार्म एक
ट्रैक क्लीनिंग मशीन के ट्रायल के चलते सबसे व्यस्त स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर-1 एक घंटे बाधित रहा। दोपहर 2.30 से 3.30 के बीच एक नंबर प्लेटफार्म से जाने और आने वाली ट्रेनों को दूसरे प्लेटफार्म से निकाला गया। ट्रेनों का प्लेटफार्म बदलने से यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
डीजल इंजन की स्टेशन पर कमी
स्टेशन पर पहले से ही डीजल इंजन की कमी है। रेल अधिकारी शंटिंग कार्य को लेकर डीजल इंजन की लगातार मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि स्टेशन के आसपास होने वाली डीरेलमेंट पर यहीं से डीजल इंजन को दौड़ाया जाता है। अब एक इंजन सफाई मशीन के लिए व्यवस्था करना अधिकारियों पर भारी पड़ रही है।
क्लीनिंग मशीन की विशेषता
ट्रैक क्लीनिंग मशीन को शकूरबस्ती डीजल लोको शेड के अधिकारियों ने एक रेल वैगन पर तैयार किया गया है। इरकान इंटरनेशनल लिमिटेड ने अपने सीएसआर फंड से मशीन को तैयार करने के लिए फंड मुहैया कराया है। घरों में प्रयोग होने वाली वैक्यूम क्लीनर से यह मशीन 9-10 गुणा ज्यादा पावर फुल है।
मशीन एक्सटेंडेबल हॉज सिस्टम से लैस होने से एक बार में 6 मीटर तक के एरिया को एक बार में साफ कर सकती है। मशीन में एक बार में ही 6 मैट्रिक टन कचरा इकट्ठा किया जा सकता है। साथ ही मशीन से इकट्ठा हुए कचरे को एक स्थान पर आटोमेटिक डंप किया जा सकता है।