. मेट्रो की तरह रुकने पर ही इस ट्रेन का दरवाजा खुलेगा
. इसकी सीट 360 डिग्री तक घूम सकती है
. शताब्दी की तरह पूरी ट्रेन चेयर कार वाली है
. विमानों की तरह पूरे कोच में एलईडी लाइट है
. हाई स्पीड वाई-फाई व एप से मनोरंजन की सुविधा
. प्लेटफॉर्म पर रुकते ही स्वचालित स्लाइडिंग सीढ़ी प्लेटफार्म तक खुलेगी
ट्रेन में आठ घंटे बैठ कर यात्रा करना मुश्किल होगा। ट्रेन की सीट 360 डिग्री तो घूमती है, लेकिन आरामदायक बनाने के लिए सीट पीछे नहीं झुकती। इस ट्रेन में खाना रखने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। बिना फेंसिंग के 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन दौड़ाने में दिक्कत। सेफ्टी कमिश्नर ने भी ज्यादा तेज चलाने के लिए फेंसिंग की बात की है।
ट्रेन 18 का हमने सफलतापूर्वक ट्रायल किया है। इसकी बेहतरी के लिए सुझावों को शामिल किया गया है। जल्द ही ट्रेन राष्ट्र को समर्पित की जाएगी। हमने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे हरी झंडी दिखाने का अनुरोध किया है। यह ट्रेन दिल्ली से वाराणसी के बीच की दूरी आठ घंटे में पूरी करेगी। - पीयूष गोयल, रेल मंत्री