दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन इलाके में शुक्रवार दोपहर बारिश के दौरान हुमायूं के मकबरे के नजदीक मौजूद पत्ते शाह की दरगाह के दो कमरों की छत और दीवार ढहने से अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को एलएनजेपी अस्पताल में नवादा बिहार निवासी आबिद (37) ने दम तोड़ दिया। एम्स ट्राॅमा सेंटर में भर्ती चार लोगों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन इलाके में पत्ते शाह की दरगाह में हुए हादसे के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है पुलिस इसका पता लगाने में जुटी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि कमरों की इमारत बेहद जर्जर हालत में थी।
विज्ञापन
शुक्रवार हुई बारिश के दौरान जैसे ही बुनियाद में पानी पहुंचा तो कमरे जमींदोज हो गए। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि बारिश की वजह से कमरों के पीछे गड्ढा भी बन गया था।
इसकी वजह से अचानक कमरों की छत और दीवार गिर गई। शुक्रवार और शनिवार दोनों ही दिन क्राइम टीम के अलावा एफएसएल की टीम मौके पर पहुंचीं। टीमें हादसे के कारणों तक पहुंचने का प्रयास कर रही थीं। दूसरी ओर पुलिस ने दरगाह से जुड़े कई लोगों के बयान दर्ज किए।
विज्ञापन
शुक्रवार को हादसे के बाद पुलिस की टीम दरगाह में लगे कैमरों की डीवीआर को अपने साथ ले गई थी। शनिवार को टीम उसकी मदद से हादसे की जांच करती रही।
स्थानीय लोग बोले-कमरों की मरम्मत नहीं करने दे रहा था एएसआई
स्थानीय लोगों का दावा था कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) हुमायूं के मकबरे की वजह से दरगाह में बने कमरों की मरम्मत नहीं करने दे रहा था। दरगाह में मौजूद एक शख्स ने बताया कि करीब 700 साल पुरानी दरगाह में 50 साल पहले पांच कमरों का निर्माण किया गया था। इसमें दो कमरे दरगाह के मौलवी और तीन कमरे बाहर से आने वाले जायरीन के लिए बनाए गए थे।
समय बीतता गया और कमरों की हालत जर्जर होती चली गई। 20-25 साल पहले दरगाह की देखरेख करने वाले लोगों ने इनकी मरम्मत करवाने का प्रयास किया था लेकिन हुमायूं के मकबरे को नुकसान होने की बात कर एएसआई ने ऐसा करने से रोक दिया। कई बार गुहार लगाने के बाद भी उनकी नहीं सुनी गई और आखिर शुक्रवार को हादसा हो गया।
एएसआई की टीम ने दरगाह का किया मुआयना
हजरत निजामुद्दीन इलाके में पत्ते शाह की दरगाह की दीवार और छत गिर जाने से सात लोगों की हुई मौत के बाद शनिवार सुबह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम ने घटनास्थल के आसपास की जगह का मुआयना किया। टीम ने बाबा पत्ते शाह की दरगाह के अंदर जाने की भी कोशिश की लेकिन दरगाह के मेन दरवाजे पर ताला देखकर लौट आई। इस दौरान दरगाह के आसपास के इलाके की भी जांच की।
जांच में लगा कि दरगाह के नजदीक बने बतासे वाले महल के आसपास बड़ी-बड़ी घास उग आई है। इसके बाद टीम ने दरगाह के आसपास बने जंगल को साफ करने के निर्देश दिए हैं।
दरगाह के आसपास का निरीक्षण करने के बाद टीम वीआईपी गेट से हुमायूं का मकबरा के अंदर गई। वहां दरगाह से सटे मकबरे की दीवार का जायजा लिया। हालांकि दीवार के आसपास पुलिस की ओर से सिक्योरिटी रिबन से हादसे वाली जगह को कवर दिया गया है।
इसके अलावा दरगाह के मेन गेट को अंदर से बंद कर दिया गया है। कुंडे पर ताला लगा दिया गया है। दरगाह के अंदर कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था और न ही दरगाह के अंदर बने मस्जिद में कोई व्यक्ति था। दरगाह का मलबा वहां पड़ा हुआ है। फिलहाल दरगाह की दीवार गिरने के बाद से जांच के आदेश दिए गए हैं।
सन्नाटा पसरा, लौटे श्रद्धालु
हादसे के बाद से दरगाह के चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। दरगाह को अंदर से बंद कर दिया गया है। शनिवार को इस दौरान एक-दो श्रद्धालु बाबा की दरगाह पर आए जिन्हें घटना की कोई जानकारी नहीं थी। हादसे के बारे में जानकर वह मायूस हो गए और दुखी मन से वापस चले गए।
कौन थे बाबा पत्ते शाह
बाबा पत्ते शाह का पूरा नाम हजरत शम्सुद्दीन औताद था। वह 13वीं सदी के सूफी संत थे। वह इस्लामिक शिक्षा के जानकार थे। जानकार बताते हैं कि हजरत निजामुद्दीन औलिया शिष्यों को दीनी तालीम देने के लिए उन्हें शम्सुद्दीन के पास भेजते थे। उन्होंने पूरा जीवन इस्लाम धर्म के प्रचार और प्रसार में लगा दिया। उनकी दरगाह हुमायूं के मकबरे की दीवार से सटे ग्यासपुर गांव में है। यह गांव दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा है।