साइबर सिटी में बिना सीट बेल्ट लगाकर चलने वाले वाहन चालकों की मौज है।
ट्रैफिक पुलिस की ओर से किए जाने वाले चालान से ये बात साफ जाहिर है कि बीते सालों की तुलना में इस बार अब तक 50 प्रतिशत कम चालान हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की मौत के बाद एक बार सवाल उठ गया है कि सीट बेल्ट न लगाने से हादसे की संभावना बढ़ जाती है। ट्रैफिक पुलिस की ओर से तीन साल पहले सालभर के दौरान 64,933 वाहन चालकों का चालान सीट बेल्ट न लगाने पर किया गया।
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उसके बाद बीते साल यह संख्या घटकर 37,479 हो गई। पुलिस की सख्ती सीट बेल्ट न लगाकर चलने वालों पर कम नजर आ रही है।
इस साल पांच माह के दौरान 15,006 वाहन चालकों का चालान किया गया है। डीसीपी (ट्रैफिक) विनोद कौशिक कहते हैं कि चालान कम होने का कारण चालकों में आ रही जागरूकता भी है।
ड्रंकन ड्राइव अभियान पर जोर
वाहन दुर्घटनाएं रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस का प्रयास रहता है कि कोई भी व्यक्ति शराब पीकर गाड़ी न चलाए। इसके चलते ड्रंकन ड्राइव अभियान पर अधिक जोर रहता है।
जुर्माना कम होना लापरवाही का कारण
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारी कहते हैं कि सीट बेल्ट न लगाने का एक प्रमुख कारण ये भी है कि इसे न लगाने पर जुर्माना मात्र 100 रुपये है, जिसका भुगतान मौके पर ही लिया जा सकता है।
गुड़गांव आते ही खोल देते हैं बेल्ट
कमिश्नरी की पुलिस की छवि इस कदर लोगों के जेहन में है कि दिल्ली में तो चालक सीट बेल्ट लगाकर चलते हैं, मगर जैसे ही गुड़गांव की सीमा में प्रवेश करते हैं, वैसे ही सीट बेल्ट खोल देते हैं।