36वें इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में देश और दुनिया को डिजिटल इंडिया की झलक दिख रही है, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में भारतीय शहरों से लेकर गांवों के बढ़ते कदम को दर्शाया गया है। हालांकि डिजिटल युग में ई-वेस्ट का निपटारा भारत के साथ-साथ अमेरिका, चीन व जापान जैसे देशों के लिए भी बड़ी दिक्कत है।
मेले में उत्तर प्रदेश पवेलियन में भारतीय कंपनी देसी-विदेशी दर्शकों को ई-वेस्ट के प्रति जागरूक करते हुए ई-वेस्ट रिसाइकलिंग के साथ कमायी का संदेश भी दे रही है। उत्तर प्रदेश पवेलियन में ई-वेस्ट रिसाइकलर इंडिया के नाम से एक स्टॉल है। यहां ई-वेस्ट रिसाइकलिंग इंडिया इलेक्ट्रानिक आइटम डंप की बजाय गो ग्रीन का संदेश दे रही है।
स्टॉल में सुनीता अरोड़ा ई-वेस्ट से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की जानकारी देने के साथ-साथ कबाड़ से कमायी करने के लिए दर्शकों को जागरूक कर रही हैं। सुनीता के मुताबिक, ई-वेस्ट बेचने के इच्छुक ग्राहकों को टोल फ्री नंबर 1800-1025-679 पर फोन करना होगा।
उसके बाद कंपनी के कर्मचारी अपना वाहन लेकर आपके घर तय समय सीमा में पहुंच जाएंगे। इस सेवा का लाभ दिल्ली के अलावा देश के किसी भी शहर में लिया जा सकता है। यहां कंप्यूटर,मोबाइल, होम एप्लाइंसेस आदि खरीदा जाता है। इलेक्ट्रॉनिक सामान को 35 रुपये किलो मेटल के आधार पर खरीदा जाता है।
कंप्यूटर यदि ठीक काम करने की हालत में हो तो उसे एनजीओ को दे दिया जाता है, ताकि गरीब बच्चे कंप्यूटर की तालीम हासिल कर सकें। इसके लिए बाकायदा देशभर के कई एनजीओ को भी जोड़ा गया है।
सुनीता के मुताबिक, इंडिया -इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में डिजिटल इंडिया थीम बेशक तकनीक से जुड़ने का संदेश देती है, लेकिन ई-वेस्ट के प्रदूषण को खपाने से लेकर उसके चलते ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से हर कोई वाकिफ है। इलेक्ट्रानिक गैजेट्स के युग में नए एप्लाइसेंस आने के चलते हर घर के स्टोर रूम में पुराना सामान मिल जाएगा। प्रयोग में न होने के चलते घरों में कबाड़ इकट्ठा होता रहता है लेकिन अब आप कबाड़घर में रखे ई-वेस्ट से कमायी भी कर सकते हैं।
मथुरा में फैक्टरी में होता है ई-वेस्ट रिसाइकिल
सुनीता के मुताबिक, मथुरा स्थित कोशी -कोतवान में ई-वेस्ट रिसाइकलिंग की फैक्टरी लगायी गयी है। यहां पर कर्मचारी मेटल को अलग करते हैं, उसके बाद प्लास्टिक को अलग किया जाता है। प्लास्टिक मोतियों की शेप में बाहर निकलता है, जिसे प्लास्टिक से विभिन्न सामान बनाने वाली कंपनियों को बेच दिया जाता है। जबकि मेटल भी प्रयोग में ले लिया जाता है। कंपनी अभी तक आठ सौ सौ परिवारों तक अपनी पहुंच और करीब चार सौ टन ई-वेस्ट को ठिकाने लगा चुकी है।