पावर कारपोरेशन गर्मियों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति देने की तैयारी कर रहा है। पहले चरण में कस्बों-शहरों और जिला-तहसील मुख्यालयों को इस श्रेणी में रखा जाएगा। अभी तक इनको 12-18 घंटे बिजली दी जा रही है।
कारपोरेशन के चेयरमैन संजय अग्रवाल सोमवार को लखनऊ में सूबे के अधिकारियों की बैठक में मौजूदा संसाधनों में नई व्यवस्था पर विचार करेंगे।
पावर कारपोरेशन की सोमवार को लखनऊ में होने वाली बैठक में यदि सब ठीक रहा तो सूबे के लोगों को गर्मियों में भरपूर बिजली मिलेगी। पावर कारपोरेशन की नई योजना सूबे में 24 घंटे बिजली देने की है।
उत्तराखंड में यूपी की इकाई मई माह में उत्पादन शुरू कर देगी। इसके बाद माना जा रहा है बिजली संकट काफी हद तक काबू कर लिया जाएगा।
इसके चलते कारपोरेशन ने पहले चरण में कस्बों-शहरों और जिला-तहसील मुख्यालयों को 24 घंटे सप्लाई देने की योजना तैयार की है। इनको 24 घंटे सप्लाई देने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों को 16 घंटे सप्लाई देने की तैयारी है।
गाजियाबाद, नोएडा और लखनऊ आदि चुनिंदा शहरों को 24 घंटे सप्लाई मिल रही है। हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह में अपने आदेश में चुनिंदा शहरों को 24 घंटे बिजली देने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए इसको तत्काल वापस लेने के आदेश दिए थे।
पावर कारपोरेशन बिजली खरीद कर 24 घंटे सप्लाई देने की योजना तैयार कर रहा है, लेकिन संसाधनों की स्थिति जर्जर है। इसके लिए अफसरों की बैठक सोमवार को लखनऊ में बुलाई गई है।
इसमें विभिन्न जनपदों में मौजूदा संसाधनों की स्थिति और 24 घंटे सप्लाई लेने के लिए जरूरी सुधार किए जा सकते हैं। बैठक में कारपोरेशन के एमडी से लेकर एक्सईएन तक के अधिकारी भाग लेंगे।
बिजली संकट हर साल
कारपोरेशन के पावर सप्लाई के दावे फाइलों से बाहर निकलकर हकीकत में नहीं बदल सके। वर्ष- 2011-12 में औसतन 12-14 घंटे ही आपूर्ति मिल पाई थी। महानगर में लोगों को बिजली-पानी को लेकर सड़क पर उतरना पड़ा था।
एनएच पर कई बार जाम लगा। नाराज उपभोक्ताओं ने पावर स्टेशनों पर तोड़फोड़ की थी, डीएम का आवास तक लोगों ने घेरा था। वर्ष-13 में हालात काफी ठीक रहे। लोगों को औसतन 16-18 घंटे बिजली मिलती रही।
दावे हैं दावों का क्या
कारपोरेशन ने दो साल पहले भी महानगर को 24 घंटे सप्लाई देने का दावा किया था, जोकि पूूरा नहीं हुआ। सप्लाई सुधारने, संसाधन विकसित करने और गांवों से शहरों तक 18-20 घंटे बिजली देने के निर्णय पूर्व की बैठकों में लिए गए। हर बार गर्मियों से पहले अफसर इसी तरह के दावे करते हैं, जिनका हकीकत बनना आसान नहीं लगता।