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हर गांव में खड़े हो रहे ‘मौत’ के अवैध टावर, पूरे एनसीआर में गलत जमीनों पर बन रहीं इमारतें

Thu, 19 Jul 2018 09:30 AM IST
सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
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ग्रेटर नोएडा का शाहबेरी गांव। गांव के चारो ओर ऊंची-ऊंची हाउसिंग सोसाइटियां। सोसाइटियों की नकल करते हुए गांव में टावर की शक्ल में पांच से सात मंजिला सस्ते मकानों का धड़ल्ले से निर्माण कराते छोटे-छोटे बिल्डर।

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सुविधाओं के नाम पर न ढंग की सड़क, न बिजली, न पानी। कुछ ऐसा ही घटनास्थल से आसपास देखने पर नजर आया, जहां बीती रात दो बड़ी-बड़ी इमारतें (छह मंजिला) जमींदोज हो गईं।

यह बड़े-बड़े नामचीन बिल्डरों के सोसाइटियों की इमारत नहीं थी बल्कि गांव में बनी वैसी इमारतें थीं, जिसकी जवाबदेही से सभी एजेंसियां बच रही हैं। खास बात यह कि शाहबेरी केवल उदाहरण मात्र हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा सहित एनसीआर के सभी गांवों में ऐसी अवैध इमारतें धड़ल्ले से बनती नजर आ जाएंगी।
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गांवों में भवन निर्माण के लिए यह है नियम
नोएडा प्राधिकरण के सीनियर टाउन प्लानर एके मिश्रा का कहना है कि भवन नियमावली 2016 में नोएडा के गांवों में भी किसी निर्माण से पहले नक्शा पास कराना जरूरी हो गया है। यही नहीं इमारत की ऊंचाई 15 मीटर या 50 फीट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यहां के लिए 1.8 एफएआर तय की गई है। यानी अगर 100 मीटर का कोई प्लॉट है तो प्लॉट मालिक को 180 वर्गमीटर में इमारत बनानी है। अगर वह चाहे तो 60-60 मीटर की तीन मंजिल बना सकती है। 45-45 मीटर की चार मंजिल इमारत बना सकता है। लेकिन ऊंचाई 15 मीटर यानी 50 फुट से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

नक्शा पास कराने की जहमत नहीं उठाते लोग

building - फोटो : अमर उजाला
गांव की जमीन पर मकान बनाने के लिए प्राधिकरण से नक्शा पास कराना होता है। यहां नक्शा पास कराते समय प्राधिकरण की ओर से मकान की गुणवत्ता के लिए कई निर्देश दिए जाते हैं।

इसके बाद जब मकान का काम पूरा हो जाता है तो एक बार फिर से प्राधिकरण की ओर से मुहर लगती है। लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जब कोई नक्शा पास कराने आए तब तो जांच की जाए कि इमारत निर्माण की गुणवत्ता कैसी है।

कार्रवाई के बजाए अधिकारी मूंद लेते हैं आंखें
नोएडा को 10 वर्क सर्किल में बांटा गया है। इसका जिम्मा प्रोेजेक्ट इंजीनियर (पुराना पदनाम) को दिया जाता है। उनके नीचे एपीई होते हैं। एपीई के नीचे जूनियर इंजीनियर के जिम्मे नोएडा के क्षेत्र होते हैं। इसमें सेक्टरों के अलावा गांवों का हिस्सा भी होता है। जानकारों की मानें तो गांवों में इस तरह की गतिविधि का पता चलने पर निचले स्तर का अधिकारी आंखें मूंद लेता है। उसे उसका फायदा मिल जाता है।

केवल अपने अधिगृहीत जमीन से कब्जा हटाने पर ध्यान देता है प्राधिकरण
नोएडा प्राधिकरण की ओर से समय-समय पर गांवों में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाता है और ऐसी इमारतें सील की जाती हैं। लेकिन पूरा अभियान केवल अधिगृहीत जमीनों के लिए होता है। इसके अलावा किसी भी अवैध निर्माण पर प्राधिकरण कभी सवाल नहीं उठाता है।

गांवों की आबादी पर क्या कहता है प्राधिकरण
गांव की मूल आबादी पर किसी तरह के रेगुलेशन की जरूरत नहीं होती है। लेकिन जिन किसानों ने अपनी जमीन बिल्डरों को बेच दी है। उनको मकान निर्माण के दौरान नियम तोड़ने पर प्राधिकरण की ओर से नोटिस भी दिया जाता है। बगैर अनुमति के निर्माण पर भी नोटिस दिया जाता है।
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कैसे-कैसे अवैध निर्माण:-

building - फोटो : अमर उजाला
कैसे-कैसे अवैध निर्माण:-
1. प्राधिकरण की अधिगृहीत जमीन पर अवैध निर्माण
नोएडा प्राधिकरण ने 81 गांवों में जमीन अधिग्रहण तो कर लिया। लेकिन अधिग्रहण के बाद अपनी जमीन को कब्जे में लेना भूल गया। इसके बाद वहां रहने वाले लोग बिल्डरों से मिलकर उस पर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कर देते हैं। गेझा और गढ़ी चौखंडी में ऐसी ही इमारतों को प्राधिकरण ने सील किया है। लेकिन अभी भी बसई ब्राउद्दीनपुर, सर्फाबाद सहित कई गांवों में प्राधिकरण की जमीन पर अवैध तरीके से बनी इमारतें खड़ी हैं।

2. किसानों से जमीन लेकर बिल्डरों का अवैध निर्माण
कई गांवों में बिल्डरों की ओर से किसानों से जमीन लेकर फ्लैट बनाए जा रहे हैं। यह फ्लैट नियमों को ताक पर रखकर बनाए जा रहे हैं। इसमें गेझा, भंगेल, हाजीपुर, सलारपुर, सदरपुर के अलावा दूसरे कई गांव शामिल हैं।

3. डूब क्षेत्र में कॉलोनी काटकर बिल्डरों का अवैध निर्माण
नोएडा के 12 गांवों में डूब क्षेत्र में अवैध कालोनियां काटी जा रही हैं। छिजारसी से लेकर बहलोलपुर तक कई गांवों अवैध निर्माण वाले घरों में लोग रह रहे हैं। इसके अलावा कई गांवों धड़ाधड़ अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। डूब क्षेत्र की जमीन पर केवल खेती की जा सकती है। लेकिन यहां रिहाइश बनाई जा रही है।

4. किसान खुद ही बिल्डर बनकर कर रहे अवैध निर्माण
कई गांवों में किसान खुद ही निर्माण कार्य करा रहे हैं। यहां फायदे के लिए कोई बिल्डर नहीं है बल्कि किसान खुद ही सबकुछ जुगाड़ कर रहा है। ऊंची इमारतें बनाने का अनुभव नहीं होने के बाद बावजूद ज्यादा से ज्यादा फ्लोर बनाने के चक्कर में लोगों को खतरा उठाने पर मजबूर कर रहे हैं।

यहां होती है गांवों में अवैध निर्माण में लापरवाही
बिल्डर जब घर बनाता है तो वहां कम गुणवत्ता वाली सामग्रियों का प्रयोग करता है, जिससे लागत कम आए। इसके अलावा नक्शा पास नहीं कराता है। इससे खतरा बना रहता है। यही नहीं एक्सपर्ट ठेकेदारों से काम नहीं कराने की वजह से तकनीकी तौर पर इमारत खतरनाक साबित होती है। नींव मजबूत नहीं होती है। यही नहीं बेसमेंट का नियम नहीं पता होने की वजह से ज्यादा खुदाई करने पर कहीं-कहीं नींव कमजोर हो जाती है, जो कि इमारत जमींदोज होने की वजह बनती है।
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