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Delhi: आधुनिक तरीके से जंतर-मंतर की प्राचीन तकनीक देख पाएंगे पर्यटक, मुख्य द्वार नए रंग रूप में जल्द आएगा नजर

Mon, 15 May 2023 07:52 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

यहां एक केंद्र भी निर्मित किया जाएगा। इसमें भारत के प्राचीन खगोल विज्ञान के बारे वीडियो, थ्रीडी व डिजिटल माध्यम से पर्यटकों को जागरूक किया जाएगा। इसी तरह यंत्रों व स्मारक के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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जंतर मंतर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जंतर मंतर की प्राचीन खगोल विज्ञान तकनीक को पर्यटक अब आधुनिक तरीके से आसानी से देख व समझ पाएंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) इस स्मारक में बड़े स्तर पर संरक्षण कार्य कराने जा रहा है। साथ ही ऐतिहासिक धरोहर में स्थित वेधशाला को संरक्षित करेगी। यहां लगे यंत्रों की दशा सुधारी और इन्हें सुचारू किया जाएगा। यंत्रों की सीढि़यों की मरम्मत भी की जाएगी।

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यहां एक केंद्र भी निर्मित किया जाएगा। इसमें भारत के प्राचीन खगोल विज्ञान के बारे वीडियो, थ्रीडी व डिजिटल माध्यम से पर्यटकों को जागरूक किया जाएगा। इसी तरह यंत्रों व स्मारक के बारे में जानकारी दी जाएगी। स्मारक को रात में रोशन करने की भी योजना है। जिससे इसे लोग रात में भी देख सकेंगे। ऐसे में किसी यंत्र पर इसका विपरीत असर न पड़े, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। 

इसके अलावा जी 20 शिखर सम्मेलन को देखते हुए इसके मुख्य द्वार को नया रंग रूप देने साथ ही नया टिकट काउंटर बना जाएगा। जिससे यह दूर से ही लोगों को आकर्षित करेगा। इसके संरक्षण की कवायद लंबे समय से चल रही थी, लेकिन इन यंत्रों के विशेषज्ञ नहीं मिल रहे थे। ऐसे में एएसआई ने गहन अध्ययन कर इसके संरक्षण करने के लिए दो विशेषज्ञ खोेजे हैं, जो कि जयपुर से हैं। वहीं, भूमंडलीय विशेषज्ञों की मदद से यंत्रों पर मार्किंग की जाएगी। 

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मार्किंग के बाद यंत्र अपने वास्तविक रूप में आ सकेंगे। यहां मुख्य रूप से चार यंत्र मिश्र यंत्र, सम्राट यंत्र, जयप्रकाश यंत्र व राम यंत्र हैं। यह सभी यंत्र मौसम के साथ ग्रह-नक्षत्र की सूक्ष्मतम गणना, सूर्य व चंद्र ग्रहण समेत कई तरह की खगोलीय घटना के बारे में बताते हैं। वर्तमान में मिश्र यंत्र व जय प्रकाश यंत्र थोड़ा ठीक अवस्था में हैं, जो समय बताते हैं। 

इतिहास
चिनाई से निर्मित जंतर मंतर में स्थित वृहद खगोलीय यंत्र विश्व की असाधारण कृतियों में से एक है। इनसे प्राचीन खगोलीय संस्थाओं के अंतिम स्वरूप के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। इसका निर्माण जयनगर व जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय (1699-1743) ने कराया था। मिश्र यंत्र की मान्यता है कि इसका निर्माण जयसिंह के पुत्र महाराजा माधोसिंह ने (1751-68) द्वारा कराया गया था।  

चारों यंत्र, उनका आकार और प्रयोग  
जयप्रकाश यंत्र का व्यास लगभग 6.33 मीटर है। इसका उपयोग खगोलीय पिंडों, स्थानीय समय व राशिवलयों का समन्वयात्मकता मापने के लिए किया जाता था। मिश्र यंत्र अंतरराष्ट्रीय समय दर्शाता है। इसमें जापान, आइलैंड, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड का समय देखा जा सकता था। वहीं, सम्राट यंत्र एशिया की सबसे बड़ी धूप घड़ी है। इससे राजा महाराजा ध्रुव तारा भी देखा करते थे। इसी तरह राम यंत्र ग्रह व उपग्रह के बारे में जानकारी देता था।

इसे जयपुर के जंतर मंतर की तर्ज पर संरक्षित करने की योजना है। इसको लेकर कमेटी बनाई गई है। यंत्रों को पहले की तरह स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शीघ्र काम शुरू किया जाएगा। हमारा प्रयास जंतर-मंतर को अपने पुराने रूप में लाना है। -प्रवीण सिंह, दिल्ली सर्कल चीफ व सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई
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