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टोक्यो ओलंपिक : दम दिखाने को तैयार दिल्ली के लाल

Sat, 24 Jul 2021 01:03 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी विनोद डबास, नई दिल्ली

सार

  • परिजनों और कोच को पदकों की उम्मीद
  • टोक्यो ओलंपिक में दिल्ली के पांच खिलाड़ी ले रहे हैं हिस्सा
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टोक्यो ओलंपिक - फोटो : social media
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विस्तार
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टोक्यो ओलंपिक में भाग ले रहे देश के 127 खिलाड़ियों में से पांच दिल्ली के रहने वाले हैं। इनके परिजनों और कोच को उम्मीद है कि वह काफी अच्छा प्रदर्शन करेंगे। क्योंकि, उनकी तैयारी अच्छी हुई है और ओलंपिक से पहले उन्होंने विभिन्न स्तर पर हुई प्रतियोगियों में अपनी क्षमता से अधिक परिणाम दिया है।

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दिल्ली के पांच में से दो खिलाड़ी एक ही प्रतिस्पर्धा में देश का प्रतिनिधितत्व करेंगे। रोहिणी में रहने वाले अमोज जैकब और राजौरी गार्डन में रह रहे सार्थक भांबरी ओलंपिक में 4×400 मीटर रिले दौड़ में हिस्सा लेंगे, जबकि तीन खिलाड़ी अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में देश का प्रतिनिधितत्व करेंगे। जगतपुर के दीपक कुमार शूटिंग और मोती नगर के सुमित नागल टेनिस में खेलेंगे।

आठ साल की उम्र में सुमित ने थाम लिया था रैकेट
टेनिस में विश्व के बड़े खिलाड़ियों के समक्ष चुनौती प्रस्तुत कर चुके सुमित नागल को ही नहीं, बल्कि उनके पिता सुरेश नागल को भी ओलंपिक में पदक जीतने की उम्मीद है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में शिक्षक सुरेश नागल बताते हैं कि उनके बेटे में कोई घबराहट नहीं है। वह ड्रा से बेफिक्र होकर अपनी तैयारी में जुटा हुआ है। सुमित ने उन्हें बताया है कि ओलंपिक में खेलने गए अधिकतर बड़े खिलाड़ियों के विरुद्ध वह कई बार खेल चुके हैं। उन्हें उनकी कमजोरी एवं खूबी के बारे में पूरी जानकारी है। उन्हें केवल पदक जीतने के लिए एक अच्छे दिन की आवश्यकता है। सुमित ने आठ साल की आयु में ही टेनिस का रैकेट हाथ में थाम लिया था। उन्होंने पश्चिम विहार में टेनिस की कोचिंग लेनी शुरू की थी।
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दीपक ने कंकड से सीखी निशानेबाजी
शूटर दीपक कुमार के परिजनों को उनसे ओलंपिक में पदक जीतने की पूरी उम्मीद है। उनके भाई राहुल का कहना है कि ओलंपिक तैयारी के लिए दीपक ने दो माह से सोशल मीडिया से दूरी बना रखी है। वह परिजनों से भी बहुत कम बात कर रहा है। वह जब भी बात करता है तो केवल पदक जीतने की तैयारी के बारे में ही बताता है। इस तरह उन्होंने अपना ध्यान तैयारी पर लगा रखा है। दीपक बचपन से निशानेबाजी का शौकीन था। वह बचपन में कंकड से निशानेबाजी करता था। उनकी निशानेबाजी में रुचि देखकर उनके परिजनों ने प्राथमिक शिक्षा के बाद उन्हें शूटिंग अकादमी में कोचिंग दिलानी शुरू की।

बचपन में ही रेसिंग ट्रैक पर उतर गया था सार्थक
एथलीट सार्थक भांबरी को सर्वप्रथम बेहतर दौड़ने के वर्षों तक टिप्स देने वाली दिल्ली सरकार की कोच सुनीता रॉय कहती हैं कि वह शुरू से ही 400 मीटर दौड़ में काफी बेहतर प्रदर्शन करता रहा है। उनकी प्रतिभा देखकर ही उन्हें 400 दौड़ में करियर बनाने की सलाह दी गई थी। उनके प्रदर्शन एवं प्रतिभा को देखकर लग रहा है कि वह ओलंपिक में देश को पदक दिलाने में समक्ष हैं। वह प्रतिभा का धनी खिलाड़ी हैं। पांचवीं कक्षा पास करने के बाद वह छत्रसाल स्टेडियम में दौड़ की कोचिंग लेने आना शुरू हो गया था। यहां कई साल तक कोचिंग लेने के दौरान वह स्कूली स्तर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने में कामयाब हुआ। इसके बाद उन्होंने नेहरू स्टेडियम में कोचिंग लेनी शुरू की।

कोच ने दी अमोज को ताकत, हर पल बने मददगार
एथलीट अमोज जैकब के कोच अरविंद कपूर बताते हैं कि ओलंपिक के लिए जैकब की बहुत अच्छी तैयारी है। वह 400 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय चैंपियन है और उनकी देश को ओलंपिक पदक दिलाने में अहम भूमिका हो सकती है। वह लक्ष्य पूरा करने के लिए अपनी ताकत लगा देते हैं और ओलंपिक पदक उनका लक्ष्य है। ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए उनको कोचिंग के टिप्स अपनाने और तनाव मुक्त रहने की सलाह दी है। अमोज जैकब का एथलीट बनने का सफर काफी कड़ा रहा। वह अपने कोच की मदद की बदौलत ही एथलीट बन सके। उनके कोच ही उन्हें कोचिंग सेंटर पर लेकर जाते थे। उनके माता-पिता के पास समय का अभाव रहता था।

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