राजधानी दिल्ली में तिमारपुर में एक जगह ऐसी है जिसके पास से वर्षों तक लोग गुजरना नहीं चाहते थे। दरअसल इस जगह पर गंदा पानी भरा रहता था और कूड़े का अंबार लगा था। इस कारण यहां हमेशा बदबू का आलम रहता था। मगर, अब इलाके के ही नहीं, बल्कि बाहर के लोग भी यहां सैर सपाटा करने के लिए आने के साथ-साथ पिकनिक भी मनाएंगे। दरअसल दिल्ली सरकार ने इस जगह को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दिया है और इसे तिमारपुर झील नाम दिया है। झील में लोग जल्द ही प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।
दिल्ली सरकार तिमारपुर झील को 40 एकड़ जमीन पर विकसित कर रही है और इसकी योजना का काम अंतिम चरण में है। इस तरह जल्द ही झील को जल्द ही आम लोगों के लिए खोला जाएगा। झील परिसर में लोगों के मनोरंजन के लिए फूड कैफे, ओपन एयर थियेटर, बटरफ्लाई पार्क, गैलरी, ऑडिटोरियम जैसी तमाम सुविधाएं होगी। वहीं झील परिसर खुलने के बाद उसकी सुंदरता के साथ ही यहां आने वाले लोग सेल्फी प्वाइंट, सीटिंग एरिया की स्टेप प्लाजा, म्यूजियम जैसी सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे। इसे सिग्नेचर ब्रिज से भी जोड़ा जा रहा है।
अंग्रेजों के जमाने में ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था
दिल्ली सरकार के मुताबिक तिमारपुर में 1940 के करीब अंग्रजों के जमाने के ट्रीटमेंट प्लांट हुआ करते थे। इन ऑक्सिडेशन पॉन्ड को गंदा पानी साफ करने के लिए प्रयोग किया जाता था। गंदे पानी को साफ करने का ये तरीका बहुत पुराना था, जिस कारण तिमारपुर की जमीन पर गंदा पानी जमा हो जाता था और बेहद बदबू भी आती थी। इसी वजह से यह प्लांट बंद किया गया। इसके बाद पिछले कई सालों से लोगों ने साइट पर कूड़ा डालना शुरू कर दिया। ऐसे में यह जगह असामाजिक तत्व का अड्डा बन गई। यहां शाम होते ही शराबियों का डेरा लग जाता था। इस कारण स्थानीय लोग स्वयं को असुरक्षित महसूस करते थे।
रोजाना 15 से 20 मिलियन गैलन पानी होगा रिचार्ज
जल मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को तिमारपुर झील का स्थलीय निरीक्षण कर परियोजना से जुड़े कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने झील को उम्मीदों के अनुरूप बनाने और समय से गुणवत्ता पूर्ण कार्यों को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि तिमारपुर में झील परिसर के निर्माण के अलावा पांच एकड़ में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी विकसित किया जा रहा है। इस प्लांट में हर रोज 25 एमएलडी पानी का शोधन किया जाएगा। इस प्लांट के शोधित पानी का इस्तेमाल झील को भरने और ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने में किया जाएगा। तिमारपुर झील से रोजाना 15 से 20 मिलियन गैलन पानी रीचार्ज होने की संभावना है।