वीडियो में अल्पसंख्यक समुदाय के किरदार में युवाओं को दिखाया गया है, जो अल्पसंख्यकों को सावधानियां बरतने से हतोत्साहित करते नजर आते हैं। वीडियो में दिख रहे किरदार इसे सीएए-एनआरसी से जोड़कर बताने का प्रयास कर रहे हैं।
इसके जरिए बताया जा रहा है कि सरकार कोरोना के बहाने एनआरसी के लिए विशेष समुदाय का पूरा डिटेल जुटा रही है। वोइजर इंफोसेक ने अपनी डिजिटल जांच रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दी है। जांच में वीडियो के स्त्रोत की जानकारी भी मिल गई है।
वीडियो जारी करने वालों का अकाउंट डिलीट
भड़काऊ वीडियो में कंटेट को मूल रूप से बनाने वाले अनेक अकाउंट डिलीट पाए गए हैैं। वोइजर इंफोसेक की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो के वायरल होने के बाद ऐसा किया जा रहा है। अकाउंट डिलीट करने से इनके मुख्य आरोपियों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए भी कड़ी चुनौती है।
हिंदी और उर्दू के वॉयस ओवर में बदला
जांच रिपोर्ट में ज्यादातर वीडियो विदेशों से फैलाए गए हैं, जिनमें हिंदी टेक्स्ट और उर्दू वॉयसओवर के साथ एडिट किया गया है। इसकी मदद से भारतीय अल्पसंख्यक समुदाय को आसानी से बरगलाया जा रहा है। जांच रिपोर्ट में इस दुष्प्रचार अभियान में विदेशी साजिश सामने निकल कर आ रही है।
कोरोना वायरस पर भड़काऊ वीडियो बनाने वाले अकाउंट बैन करने पर टिकटॉक जांच कर रहा है। टिकटॉक ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि वो ऐसे हजारों अकाउंट्स को बैन कर रहा है और वीडियोज को हटा रहा है जिनमें कोरोना वायरस को लेकर गलत सूचना दी जा रही है।
साइबर क्राइम सेल भी जांच में जुटी
वीडियोज की जानकारी होने के बाद खुफिया एजेंसियों के साथ-साथ दिल्ली की साइबर क्राइम सेल भी जांच में जुटी है। साइबर सेल वीडियो के संबंध में टिकटॉक के संपर्क में है। ऐसे वीडियो को शेयर करने वालों की तलाश शुरू कर दी है। टिकटॉक से वीडियो डाउनलोड कर इसे व्हाट्सएप के जरिए देश भर में फैलाया जा रहा है। इस मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी भी की जा चुकी है।