तिहाड़ जेल में नए कैदियों से बीएमडब्ल्यू को चलवाया जाता है। इसे कोई भी कैदी चलाना नहीं चाहता लेकिन सजा और जेल कर्मियों के डर से इसे चलाना पड़ता है। इसमें सवारी नहीं बैठती बल्कि इसमें जेल का कचरा ढोया जाता है। दरअसल जेल में कचरा ढोने वाले रिक्शा-ठेला को जेल कर्मियों और कैदियों की ओर से ‘बीएमडब्ल्यू’ नाम दिया गया है।
जेल सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जेल में डायनिंग हॉल और किचन के पास जमा कचरे को मुख्य द्वार तक लाने के लिए रिक्शा-ठेले का इस्तेमाल किया जाता है। इसी रिक्शे को बीएमडब्ल्यू का नाम दिया गया है। इसको लेकर जेल के उस वार्ड में ज्यादा चर्चा शुरू हो जाती है जिसमें कोई नया कैदी आता है। उस कैदी को यह कोड तब समझ आता है जब सुबह उसे कचरे से भरा रिक्शा चलाने के लिए कहा जाता है।
जेल सूत्रों के मुताबिक कचरे को जेल से बाहर ले जाने के लिए जो ट्रक आता है वह जेल के मुख्य द्वार तक ही आता है। मुख्य द्वार तक कचरे को रिक्शा या ठेला से लाया जाता है। जो कैदी इसे चलाने से मना करते हैं उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। तिहाड़ में इसी तर्ज पर कई कामों को कोड वर्ड दिया गया है। हालांकि तिहाड़ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (डीआईजी) मुकेश प्रसाद ने ऐसी किसी जानकारी से मना किया है।