वरिष्ठ जेल अधिकारी ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन सच है कि इनसान जितना गरीब होता है उसके अपराधी बनने के चांस उतने ही बढ़ जाते हैं। लेकिन आज जेल में जो कुछ कुख्यात मुजरिम बंद हैं वह बहुत अमीर थे। गैंगस्टर नीरज बवाना जो 15 विभत्स अपराध करने के लिए सजा भुगत रहा है वह काफी अमीर घर से ताल्लुक रखता है और अपने ही कारणों की वजह से वह अपराधी बना।
अधिकारियों के मुताबिक हर 20-25% वो कैदी आते हैं जो आदतन अपराधी होते हैं। इन लोगों के पास कोई पक्की नौकरी नहीं होती। पिछले साल ऐसे 22% कैदी थे जो स्नैचिंग या चोरी के जुर्म में गिरफ्तार हुए थे। 2016 में तिहाड़ से रिटायर होने से पहले 35 साल तक यहां लॉ ऑफिसर रहे सुनील गुप्ता कहते हैं कि अधिकतर कैदियों को तो अच्छे से पेश तक नहीं किया जाता। आधे से ज्यादा कैदी दिल्ली के झुग्गी बस्तियों से होते हैं। यह कहना गलत होगा कि हर स्लम वाला अपराधी होता है। लेकिन सच तो ये है कि इनमें से अधिकतर अपने हालातों के चलते अपराधी बन जाते हैं। ये अपने लिए वकील नहीं कर पाते और लंबे समय तक जेल में रहते हैं। गुप्ता ने कहा कि शिक्षा भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर है क्योंकि अधिकतर कैदी स्कूल छोड़ने वाले होते हैं।
एक अन्य विशेषज्ञ अजय वर्मा के अनुसार देशभर की जेलों में बंद अधिकतर कैदी गरीब होते हैं। तिहाड़ में जेल 5 के अंदर बंद कैदी 18 से 21 साल की आयु के बीच के होते हैं। कुछ समय पहले हमने ऐसे कैदियों को ज्वेलरी डिजाइनिंग की ट्रेनिंग भी दी थी। ताकि वो जॉब कर सकें जिससे उनके अंदर से अपराध करने की प्रवृत्ति को कम किया जा सके। इस तरह के प्रयास हर जेल में होने चाहिए।
जेल के एक प्रवक्ता का कहना है कि अब कैदियों में अशिक्षा की दर कम हो रही है क्योंकि जेलों में पढ़ो और पढ़ाओ जैसे कैंपेन चल रहे हैं। क्लासें होती हैं ताकि कैदी दोबारा जुर्म की दुनिया में न जाएं।