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कनॉट प्लेस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम: प्रदर्शनों के बाद बदले हालात और अंडरपास की सुधरी सूरत

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सात अंडरपास में से सिर्फ एक पर दिखा गार्ड, सुरक्षा के लिए दिन में एक और रात में दो गार्ड की तैनाती
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प्रवीण कुमार
नई दिल्ली। दिल्ली में छह जून के बाद से कनॉट प्लेस और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सीजेपी, विपक्षी दलों और छात्रों के प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ाई है। जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर रास्तों को बंद किया गया है, वहीं कैमरों और ड्रोन के जरिये गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इस बीच कनॉट प्लेस के आसपास लोगों के सुरक्षित सड़क पार करने के लिए बने अंडरपास की सूरत भी बदली है। यहां लोगों की आवाजाही कम होने के साथ गंदगी भी पहले के मुकाबले कम दिखाई दे रही है। हालांकि, सात अंडरपास में से केवल एक पर ही गार्ड मौजूद नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था के तहत दिन में प्रत्येक अंडरपास पर एक और रात में दो गार्ड तैनात रहते हैं।

अंडरपास से गुजरने वाले लोगों के मुताबिक, जंतर-मंतर पास होने के कारण यह इलाका प्रदर्शनों और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव का असर महसूस कर रहा है। लोगों का कहना है कि अंडरपास में नए कैमरे लगाए गए हैं और दिन-रात पुलिस की मौजूदगी से यहां शरारत करने वालों पर भी रोक लगी है। हालांकि, पहले यह जगह कुछ बेसहारा लोगों के ठहरने का ठिकाना भी हुआ करती थी। इसके अलावा कलाकार अंडरपास का इस्तेमाल मेकअप करने और कपड़े बदलने के लिए भी करते रहे हैं। ये अंडरपास सुबह आठ बजे से रात साढ़े आठ बजे तक खुले रहते हैं।
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अंडरपास में नशा करने वाले लोग भी आते हैं : राफिया और यश्वी ने बताया कि वे पिछले एक साल से कभी-कभार अंडरपास में भीड़ से दूर बैठने, खाने और बातचीत करने आती हैं। उनके मुताबिक, अब तक उन्हें यहां किसी अप्रिय घटना का सामना नहीं करना पड़ा है। हालांकि, कुछ लोगों ने बताया कि बंगला साहिब के नजदीक स्थित अंडरपास में नशा करने वाले लोग भी आते हैं। इस अंडरपास में कैमरे नहीं लगाए गए हैं। वहीं, कलाकार विक्रम कुमार और रजनेश का कहना है कि पिछले कुछ समय से यहां लोगों की आवाजाही कम हुई है, जिससे गंदगी भी कम रहने लगी है।
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नेत्रहीन लोगों के लिए सहारा है अंडरपास : कनॉट प्लेस के अंडरपास से गुजरने वाले रमेश दास ने बताया कि वह नेत्रहीन हैं। इस कारण अकेले सड़क पार करने में उन्हें खतरा महसूस होता है। अंडरपास में विशेष प्रकार की उभरी हुई पीले रंग की टाइलें लगाई जाती हैं, जिनकी मदद से दृष्टिबाधित लोग रास्ते की पहचान कर सकते हैं। उनका कहना है कि दिल्ली में ऐसे भूमिगत पैदल पथों की संख्या बहुत कम है।
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