क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार को पुलिस आफिस में तैनात सिपाही विवेक राणा के साथ सतीश नाम के ऐसे ठग को गिरफ्तार किया है, जो आम आदमी पार्टी का सदस्य है और जनलोकपाल आंदोलन में जेल भी जा चुका है। खुद को जज, पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक पार्टी का पदाधिकारी बताकर अफसरों को फोन कॉल कर काम कराता था।
चार सालों में 100 से ज्यादा पुलिसवालों के ट्रांसफर-पोस्टिंग करा चुका है। विवेक के अलावा उसके कहने से पोस्टिंग किए गए एक दरोगा और चार सिपाहियों को एसएसपी ने सस्पेंड कर दिया है।
13 और पुलिसवालों के नाम सामने आए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। उसके पास गाजियाबाद-एनसीआर में करोड़ों की प्रॉपर्टी है। 13 मकानों के बैनामे, दो मोबाइल और कागजात मिले हैं। इसी तरह की ठगी में वह वर्ष 2010 में बागपत से जेल भी जा चुका है।
एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि सतीश बुलंदशहर के शिकारपुर थाना क्षेत्र के वैरीना का रहने वाला है। कई सालों से अपना मकान बनाकर महेंद्रा एंक्लेव में रह रहा था। उसने एक दिसंबर 2013 को एडीजे बताकर विजयनगर एसओ हरदयाल यादव को फोन कर पैसे मांगे थे। न देने पर उसे पद से हटवाने की धमकी दी थी।
इसी तरह उनके (एसएसपी) के पास भी सिपाहियों की पोस्टिंग के लिए कई कॉल की थी। संदेह होने पर क्राइम ब्रांच से जांच कराई गई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। उससे बरामद फोन और सिम की जांच से पता चला कि उसने कुछ दिनों में ही 214 अधिकारी और जजों को सैकड़ों बार कॉल की है। सतीश के पास से ‘आप’ की सदस्यता रसीद मिली है। उससे बरामद सिम फर्जी आईडी पर हैं।