राजधानी के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के शिक्षकों को अब डेढ़ घंटे अधिक काम करना होगा। वहीं दूसरी पाली के स्कूलों में सर्दियों में 2 घंटे 20 मिनट अधिक समय देना होगा। हालांकि छात्रों के समय में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। सरकार का यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
शिक्षा निदेशालय में अतिरिक्त शिक्षा निदेशक (आरटीई) डॉ. मधु रानी तेवतिया की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून-2009 के सेक्शन 19 और 25 के प्वाइंट चार के मुताबिक, अब शिक्षकों को एक सप्ताह में कम से कम 45 घंटे स्कूल में देने होंगे यानी हर रोज अब साढ़े सात घंटे काम करना ही होगा। अभी तक शिक्षक स्कूल में साढ़े छह घंटे ही समय देते थे।
पढ़ाई के घंटों में कोई बदलाव नहीं
शिक्षा निदेशालय के आदेश के मुताबिक, बच्चों को पहले से तय समय पर ही आना होगा। उनकी क्लास भी पहले जैसे ही चलेंगी। सिर्फ शिक्षकों का समय बढ़ाया गया है। इस समय में शिक्षक रजिस्टर मेंटेन करने के साथ ही बच्चों के एसाइनमेंट के मूल्यांकन से जुड़े काम करेंगे।
मौजूदा समय------------------------बदला हुआ समय
एक पाली में चलने वाले स्कूल
7:30 से 1:30 (गर्मियों में)-----7:15 से 2:00 बजे तक
8:00 से 2:00 (सर्दियों में)-----7:15 से 2:00 बजे तक
दो पाली में चलने वाले स्कूलों की पहली पाली
7:00 से 12:30 (गर्मियों में)-----6:45 से 2:15 बजे तक
7:30 से 12:40 (सर्दियों में)-----7:15 से 2:45 बजे तक
दो पाली में चलने वाले स्कूलों की दूसरी पाली
1:00 से 6:00 (गर्मियों में)-----11:00 से 6:30 बजे तक
1:00 से 6:10 (सर्दियों में)-----10:45 से 6:15 बजे तक
शिक्षकों का विरोध शुरू
दिल्ली गवर्नमेंट स्कूल टीचर एसोसिएशन सरकार के इस आदेश के विरोध में खड़ी हो गई है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ओम सिंह और महासचिव राजकिशोर ने सवाल किया कि आरटीई के नाम पर शिक्षकों को कैसे बांधा जा सकता है। शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर इस आदेश को रुकवाया जाएगा।
वहीं एसोसिएशन के प्रेस सचिव कपिल मोहन का कहना है कि स्कूलों के अंदर पहले ही संसाधन कम हैं। शिक्षकों के बैठने का इंतजाम नहीं है। स्टाफ रूम में भी केवल 30-40 शिक्षकों के बैठने की व्यवस्था है। ऐसे में दोनों शिफ्ट के शिक्षक एक साथ कैसे बैठेंगे।