राखी नाम की महिला ने कहा कि वह प्रवीण के एहसानों को वह भूल नहीं सकती। पांच साल पहले जब उसके पति किडनी की बीमारी से ग्रस्त थे, उसने उसकी जान बचाने की मुहिम में उसके परिवार की काफी मदद की और जब 2017 में पति की बीमारी से मौत हो गई तो एक अभिभावक की तरह उसे और उसके बेटे को संभाला। उसे एक कंपनी में नौकरी दिलाई। जिससे उसका परिवार चल रहा है।
महिला ने बताया कि वह मूलत: झारखंड के साहिबगंज की रहने वाली है। वह अपने बेटे सूरज के साथ नांगलोई में रहती है। प्रवीण उसका पड़ोसी था। उसके तीन छोटे छोटे बच्चे हैं। इस इमारत में स्थित कंपनी में प्रवीण डिजाइनिंग का काम करता था। घटना वाली शाम प्रवीण ने उसके बेटे को फोन कर कंपनी में आग लगने की जानकारी दी। घटना की जानकारी मिलते ही उसका बेटा सूरज मौके पर पहुंचा और लोगों को बचाने में जुट गया।
उसने प्रवीण को काफी आवाज लगाई लेकिन वह कहीं दिखा। वह इमारत में जाने की कोशिश की लेकिन धुंआ होने की वजह से वह उपर नहीं जा पाया। राखी ने बताया कि चार दिन से प्रवीण का भाई, उसकी पत्नी और वह उसकी तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन कहीं से उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। सोमवार को वह मौके पर पहुंची तो उसकी बाइक को जली अवस्था में देखकर खुद को रोक नहीं पाई।