गणेश चतुर्थी के लिए सजाई जा रही गणेश की मूर्तियां
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वैश्विक महामारी कोविड-19 की वजह से इस साल सामान्य तरीके से गणपति उत्सव मनाने की तैयारी है। 22 अगस्त को गणेश चतुर्थी के मौके पर लोग गणपति की स्थापना करेंगे। इसके बाद अपनी श्रद्धा के अनुसार गणपति का विसर्जन किया जाएगा। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए इस बार लोग अपने घरों और मंदिरों के अंदर ही गणपति विसर्जन करेंगे।
पिछले कई सालों से यमुना में मूर्तियों के विसर्जन को लेकर एनजीटी सख्त है। जिसके बाद से ही दुर्गा पूजा और गणपति महोत्सव के बाद मूर्तियों का विसर्जन नदियों की बजाए पार्कों के अंदर बनाए गए अस्थाई तालाबों में होता आ रहा था। पूजा समितियां बड़े धूमधाम के साथ पंडालों से मूर्तियां ले जाकर तालाबों में विसर्जित किया करती हैं। लेकिन इस बार कोविड-19 की वजह से जारी अनलॉक-3 प्रक्रिया के तहत डीडीएमए (दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी) ने सार्वजनिक स्थानों जैसे कि तालाबों और नदियों में मूर्ति विसर्जन पर पाबंदी लगाई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी दिल्ली वासियों से अपील की है कि लोग अपने घरों में ही भगवान गणपति का विसर्जन करेंगे।
इस बार छोटी मूर्तियां स्थापित होंगी
लक्ष्मी नगर में प्रत्येक वर्ष गणेश सेवा मंडल मशहूर दिल्ली का महाराजा गणेश उत्सव का आयोजन करता है। यहां की सबसे बड़ी खासियत भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा होती है। मुंबई के कलाकार 10 से 15 फुट ऊंची प्रतिमा तैयार करते हैं। इसके संस्थापक महेंद्र लड्ढा ने बताया कि इस साल लवली सीनियर सेकेंडरी पब्लिक स्कूल में भगवान गणेश की छोटी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। जिसे स्कूल के अंदर ही विसर्जित किया जाएगा। एनएसपी के लाल बाग का राजा गणपति उत्सव में भी गणेश की छोटी प्रतिमा स्थापित होगी। जो लोग अपने घर में गणेश की प्रतिमा स्थापित करेंगे, वह भी घर पर ही विसर्जन करेंगे।