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पुलिसवालों को नहीं है ये खास जानकारी, इसलिए पीड़ित को नहीं मिलता इंसाफ

Wed, 25 May 2016 01:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली पुलिस
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पुलिसकर्मियों को इलेक्ट्रॉनिक व फॉरेंसिक तकनीकों की जानकारी की कमी गुणवत्तापूर्ण जांच में बाधा बन रही है और इससे मुकदमों में आरोपियों को सजा मिलने की दर कम हो रही है। 
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इसीलिए पुलिस आयुक्त पुलिसकर्मियों को इस क्षेत्र में प्रशिक्षण दिलवाएं। यह टिप्पणी अदालत ने एक मामले में सुनवाई के दौरान की है। तीस हजारी अदालत के महानगर दंडाधिकारी अभिलाष मल्होत्रा ने कहा कि मोबाइल-लैपटॉप की चोरी व झटपमारी के अपराध में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। 

ऐसी वारदातों को अंजान लोग अंजाम देते हैं और इस कारण आरोपी को पीड़ित नहीं पहचान पाता। इन मामलों में आरोपियों को पकड़ने में इलेक्ट्रॉनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 
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2300 हवलदार व सिपाही में से केवल 107 के पास बुनियादी ट्रेनिंग

चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
अदालत ने कहा कि इन क्षेत्रों की जानकारी के अभाव के कारण न केवल केस की जांच खराब होती है बल्कि पीड़ित को इंसाफ भी नहीं मिलता। अदालत ने कहा कि पुलिस आयुक्त इस गंभीर समस्या की जानकारी लें और हवलदार व सिपाही के स्तर पर पुलिसकर्मियों को इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिलवाने के लिये उचित कदम उठाएं ताकि जांच की गुणवत्ता व स्तर को सुधारा जा सके। 

अदालत ने इससे पहले उत्तरी दिल्ली में हवलदार व सिपाहियों को इलेक्ट्रॉनिक व फॉरेंसिक तकनीकों की ट्रेनिंग के बारे में संयुक्त पुलिस आयुक्त से जानकारी मांगी थी। 

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर कहा था कि उत्तरी जिले में 2300 हवलदार व सिपाही तैनात हैं लेकिन इनमें से केवल 107 को इलेक्ट्रॉनिक व फॉरेंसिक जांच तकनीकों की बुनियादी ट्रेनिंग दिलवाई गई है।
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