दिल्ली में चलती बस में हुए गैंगरेप की घटना के बाद देशभर में भले ही महिला सुरक्षा को लेकर कोहराम मचा हो पर उसका असर यहां ज्यादा नहीं दिखता है। आंकड़े तो यहीं कहते हैं।
वर्ष 2012 के 44 दुष्कर्म मामलों के मुकाबले इस साल नवंबर महीने तक 120 केस दर्ज हो चुके हैं। इनमें सौ से अधिक मामले में आरोपी जेल जा चुके हैं। अभी दिसंबर महीना आधा बाकी है।
दिल्ली में बिटिया कांड के बाद संसद से लेकर गली मोहल्ले में महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। उसके बाद महिलाओं में जागरूकता भी आई। कमिश्नरी की पुलिस की ओर से महिला सुरक्षा को लेकर कई बंदोबस्त किए गए, इसके बावजूद महिला अपराधों से संबंधित आंकड़ों पर हर साल इजाफा हुआ है।
हालांकि पुलिस इसके पीछे अलग तर्क दे रही है। पुलिस की मानें तो महिलाओं में अब अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूकता आई है। इसका नतीजा है कि मामले अधिक दर्ज हो रहे हैं। महिला अधिकारों पर काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों की मानें तो जिस कदर साइबर सिटी में महिलाओं के साथ आपराधिक मामले बढ़े हैं, उसे देखते हुए यहां पर किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हुए हैं।
महिला पीसीआर के साथ-साथ महिला पुलिसकर्मियों व अधिकारियों की संख्या भी बढ़ाने की जरूरत है। कमिश्नरी में दर्ज होने वाले अपराध में ज्यादा से ज्यादा मामले लिव इन रिलेशनशिप के दौरान दुष्कर्म के सामने आए।
इसके पीछे भी बिटिया कांड के बाद लोगों में आई जागरूकता माना जा रहा है। दर्ज होने वाले मामले में 55 प्रतिशत मामले लिव-इन-रिलेशनशिप के हैं। पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज देती है।