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दिल्ली की जहरीली सच्चाई से लड़ रहा एक विदेशी

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जहां एक ओर क्लीन इंडिया की बात की जा रही है वहीं दूसरी ओर हर रोज कड़वे सच हमें सोचने पर जरुर मजबूर करते हैं। हालांकि इन सच्चाईयों से हमारा सामना रोजाना होता है, लेकिन इन्हें हम यूं ही नजरअंदाज कर देते हैं।
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आज हम आपको एक नहीं बल्कि उन दो शख्स की कहानियों से मिलवाएंगे जिन्होंने शासन के खिलाफ ही एक अनोखी जंग छेड़ दी है। पहली कहानी है दिल्ली में रहने वाले रवीन्द्र राज की। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील रह चुके रवीन्द्र अस्थमा और एलर्जी के मरीज हैं और इनकी बीमारी की जिम्मेदार है दिल्ली की हवा में उड़ती धूल।

इस शख्स बिना किसी आंदोलन के खुद ही दिल्ली के प्रदूषण को कम करने की एक अनोखी पहल शुरू कर दी। रवीन्द्र सिफारिश करते हैं कि दिल्ली में साफ सफाई का काम रात को किया जाए, क्योंकि उड़ने वाली धूल लोगों की जिंदगी को खराब कर रही है।
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सरकारी महकमों से छेड़ दी है जंग

रवीन्द्र ने इसके लिए सरकामी महकमों के खिलाफ ही जंग छेड़ दी है। हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक रवीन्द्र अबतक 10 जनहित याचिका दायर कर चुके हैं। कई पत्र इन महकमों को इनकी तरफ से भेजे गए हैं, लेकिन कोई बदलाव फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है।

सन 2009 में दिल्ली हाइकोर्ट ने रवीन्द्र की जनहित याचिका पर कार्रवाई करते हुए एमसीडी को फटकार लगाई थी कि वो क्यों रात को क्यों साफ सफाई नहीं कराते।

दिल्ली की आबोहवा लगातार प्रदूषित होती जा रही है। हिन्दुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में रवीन्द्र कहते हैं कि उन्होंने चाइना, सिंगापुर, और यूएस की स्थितियों पर अध्ययन किया है।

इस तरह ये सफाई ही बन गई है जानलेवा

रवीन्द्र ये भी कहते हैं उनसे डॉक्टर ने कहा कि सुबह के वक्त साफ सफाई होने से हवा में उड़ते धूल के कड़ लोगों को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। खासकर बच्चों के लिए वहीं दूसरी ओर अगर रात में साफ सफाई के इस काम को किया जाता है तो धूल को अवशोषित होने का वक्त मिल जाता है।

जिससे लोगों में बीमारियों की संभावना कम हो जाती है। रवीन्द्र ये भी कहते हैं कि उन्होंने विशेषज्ञों से जब बात की तो उन्हें पत चला कि इस तरह के अस्थमा और एलर्जी के 90 प्रतिशत केस इसी वजह से होते हैं।

अब बात दूसरी कहानी की। दूसरे शख्स है जोसुआ आप्टे जो कि यूएस के ऑस्टिन के करने वाले हैं, लेकिन इन दिनों दिल्ली की बिगड़ती आबोहवा की जांच करने में लगे हैं।

पिछले कुछ सालों में जोसुआ दिल्ली के प्रदूषित होतो वातावरण पर कई अध्ययन कर चुके हैं। अक्सर भारत की यात्रा पर रहने वाले आप्टे इस वक्त इंडिया गेट और कनाट प्लेस के बीच की स्थिति जानने में व्यस्त हैं।
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इस तरह जुटे हैं इस लड़ाई में

पिछले साल भी आप्टे अपनी इस तरह के कार्य के लिए सुर्खियों में रह चुके हैं। एक ऑटो रिक्शा में एक कम्प्यूर एक एअर क्वालिटी मीटर के सहारे अपना काम करने वाले आप्टे एक से दो घंटे रोजाना दिल्ली की सड़कों पर बिताते हैं।

लगभग 80 बार वो दक्षिणी दिल्ली के सीआर पार्क और ग्रेटर कैलाश तक कई बार भीड़ भाड़ वाले घंटों में सड़कों पर दिखाई देते हैं जिससे एक फिक्स रिसर्च सेम्पल इकट्ठा कर सकें।

जहां ये दोनों ही कहानियां एक ही तरह की लड़ाई के लिए लड़ी जा रही हैं तो वहीं दूसरी ओर चल रहा भारत स्वच्छता अभियान का महज सेलिब्रिटियों के झाड़ू उठाने भर से दिल्ली की आबोहवा को प्रदूषण मुक्त कर पाएगा। क्या इन लोगों की तरह ही चल रही कुछ और लड़ाईयां इन्हें कामयाब करेंगी या फिर जहरीली दिल्ली में दिल्लीवासी बीमारियों का शिकार होते रहेंगे।

फोटो साभार: हिन्दुस्तान टाइम्स
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