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तो ये हैं AAP की लड़ाई में केजरीवाल के नए सिपाही

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दिल्ली की सियासी तस्वीर और सियासत में जिस तरह से आम आदमी पार्टी ने अपने तौर तरीकों में बदलाव किया उसी तरह अब 'आप' से चेहरे भी बदलने वाले हैं। जहां एक पार्टी में एक के बाद एक नए मसलों पर आप की स्थिति और हालत खराब हुई वहीं दूसरी ओर इस स्थिति से कुछ चेहरों को फायदा मिल सकता है।
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10 फरवरी में दिल्ली के चुनाव परिणाम के बाद रिजल्ट की घोषणा हो रही थी, तो वहां पार्टी ऑफिस की बालकनी में लगी नेताओं की भीड़ में एक नई केजरीवाल की कोर टीम दिखाई दे रही थी। इस टीम से प्रशांत भूषण तो गायब थे ही वहीं योगेन्द्र यादव भी काफी देर में आए।

यानि पार्टी में इन दोनों नेताओं को बाहर करने का रास्ता साफ कर दिया गया था, वहीं उनकी जगह कुछ नए नेता भी प्रमोट कर दिए गए, हालांकि अबतक किसी भी तरह की आंतरिक कलह खुलकर सामने नहीं आई थी। हां इतना जरूर है कि पार्टी के लिए नए 'प्रशांत भूषण' और 'योगेन्द्र यादव' का फैसला हो गया था।
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आशुतोष को मिल सकता है पीएसी में शामिल होने का मौका

योगेन्द्र यादव और प्रशांत की छुट्टी के बाद इन पांच नेताओं का प्रमोशन पक्का है, और इनमें से दो नेता योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण की जगह को भरेंगे। पहला नाम जो सामने आ रहा है वो है पूर्व टीवी पत्रकार आशुतोष का।

एक टीवी न्यूज चैनल को छोड़कर आशुतोष आम आदमी पार्टी का हिस्सा बने। आशुतोष ने बहुत जल्दी ही आम आदमी पार्टी में अपनी बड़ी जगह पक्की कर ली। एक रणनीतिकार के रूप में आशुतोष बेहतरीन काम कर रहे हैं जिसे पार्टी में खासा पसंद किया जा रहा है।

हां इतना जरूर है कि शुरूआत में आशुतोष पार्टी के प्रवक्ता बने जिसमें उनसे गलतियां भी हुईं, लेकिन पार्टी में बढ़ती उनकी स्थिति को देखा जाए तो कुल मिलाकर वो अपनी स्थिति मजबूत किए हुए हैं, और हो सकता है कि जब नई पीएसी का गठन हो तो आशुतोष को उसमें जगह मिल जाए।

आशीष खेतान हो सकते हैं पार्टी के नए प्रशांत भूषण

आम आदमी पार्टी में दूसरे ऐसे नेता हैं आशीष खेतान जो इस वक्त में पार्टी में प्रमोशन पा सकते हैं। वैसे तो एक खोजी पत्रकार के रूप में आशीष खेतान ने अपनी पहचान बनाई थी, लेकिन पार्टी का दिल्ली डायलॉग की सफलता का श्रेय पार्टी को जाता है।

खोजी पत्रकार और भ्रष्टाचार का खुद पहरूआ बताने वाले आशीष को पार्टी में अब नई भूमिका मिलने की पूरी उम्मीद दिखाई दे रही है। जहां पार्टी से प्रशांत भूषण को बाहर करने की प्रक्रिया तेज हो गई है तो खेतान की स्थिति मजबूत होती दिखाई दे रही है।

राजनीति विश्लेषकों की मानें तो खेतान का प्रमोशन होगा। उनपर विपक्षियों को घेरने और तथ्यों के खुफिया दस्तावेजों की खोज की जिम्मेदारी होगी। जहां वो पीएसी की वेटिंग लिस्ट में तो हैं ही वहीं अब वो नए प्रशांत भूषण के रूप में भी नजर आ सकते हैं।

नया प्रयोग हुआ तो संजय सिंह की बढ़ सकती है जिम्मेदारी

ये तो सबको पता है कि केजरीवाल पार्टी में सबसे ज्यादा भरोसा किसी पर करते हैं तो वो मनीष सिसोदिया ही हैं। जिसका उन्हें फायदा मिला और वो दिल्ली के मुख्यमंत्री बनाए गए। वहीं सिसोदिया के बाद संजय सिंह एक ऐसे शख्स हैं जिनपर केजरीवाल को ज्यादा भरोसा है।

पुरानी पार्टी के फैसलों में संजय सिंह की भूमिका पर गौर करें तो टिकट बंटवारे से लेकर पार्टी के अंदरुनी फैसलों में इस नेता ने अपनी पकड़ बना ली है। जिस संयोजक के पद को लेकर आप में अंदरूनी कलह बढ़ी थी, अगर भविष्य में केजरीवाल उस पद को छोड़ते हैं तो सबसे ज्यादा फायदा संजय सिंह को मिलेगा।

योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण दो ऐसे नेता तो जो इस रेस में संजय सिंह को कड़ी टक्कर दे सकते थे, लेकिन फिलहाल संजय का रास्ता साफ हो गया है। यानि भविष्य में संजय सिंह आप के बड़े सिपाही हो सकते हैं।

कुमार विश्वास बन गए हैं AAP के फुलटाइम राजनेता

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है से युवाओं के दिल में प्रेम कवि के रूप में जगह बनाने वाले कुमार विश्वास अब आम आदमी पार्टी में बड़ा नाम बन चुके हैं। हालांकि वो हमेशा कहते रहे हैं कि वो पार्टी टाइम राजनेता और पार्टी टाइम कवि हैं, लेकिन फिलहाल उनकी ऐसी स्थिति नहीं दिखाई देती।

हां आम चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी से हार का मुंह देखने के बाद विश्वास का विश्वास जरूर डगमगा गया था, लेकिन पार्टी में मची उथल-पुथल और दिल्ली चुनावों में धुआंधार प्रचार के बाद कुमार विश्वास बड़े नेता के रुप में सामने आए हैं।

कुमार अब ज्यादा सहनशील नेता का परिचय देते हैं। ऐसे में कुमार का पार्टी में कद बढ़ना तय है। पार्टी के संयोज और राज्यसभा की सीट को लेकर कुमार विश्वास का नाम चर्चा में है।
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लो-प्रोफाइल इस नेता को मिल सकता है बड़ा इनाम

पंकज गुप्ता एक ऐसा नाम है जो आम आदमी पार्टी के लिए नया नहीं है, हां लोगों के लिए नया जरूर है। फिलहाल पार्टी में पंकज गुप्ता फंडिंग के इंजार्ज हैं और उस केजरीवाल के भरोसेमंद लोगों की टीम में इनका नाम शामिल है।

पंकज गुप्ता अबतक लो प्रोफाइल नेता के तौर पर अबतक अपनी भूमिका निभाते हैं। अभी वो पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। इन्हें सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है। नौकरी छोड़ने के बाद ये सामाजिक कार्य में जुट गए थे।

सबसे पहले पंकज ने गरीब परिवार के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, और फिर जनलोकपाल आंदोलन में शामिल होकर आम आदमी पार्टी का हिस्सा बन गए। ऐसे में इस नेता को पार्टी में लो-प्रोफाइल और केजरीवाल के प्रति ईमानदार बने रहने का इनाम मिल सकता है।
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