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यहां यौन उत्पीड़न रोकथाम का कोई इंतजाम नहीं

Mon, 24 Nov 2014 01:20 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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जिले के निजी अस्पताल और नर्सिंग होमों में महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बनाया गया कानून लागू नहीं हो पा रहा है। वजह जिला उपायुक्त (डीसी) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) इस कानून को लागू करना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते। निजी अस्पतालों में इस सेल के गठन की स्थिति के बारे में आरटीआई से मांगी गई जानकारी से इस बात का खुलासा हुआ है। सूचना अधिकार के तहत मांगी गई महिला सेल संबंधी जानकारी चौदह माह बाद भी नहीं दी गई।
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कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से 22 अप्रैल 2013 को ‘दि सेक्सुअल हरॅसमेंट और विमेन एट वर्कप्लेस’ (प्रिवेंशन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) एक्ट लागू किया गया था। इसके तहत किसी भी संस्था में जहां 10 से अधिक महिला कार्य करती हैं, यह एक्ट लागू किया जाएगा। ‘संस्था’ में सरकारी संस्थाओं के अलावा सरकार से  प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष, पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तीय या अन्य सहायताएं करने वाली निजी संस्थाएं रखी गई  हैं। इसमें निजी अस्पताल और नर्सिंग होम भी शामिल हैं।

इस एक्ट के तहत जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में महिला यौन उत्पीड़न रोकथाम सेल का गठन किया गया या नहीं? जनसूचना कार्यकर्ता रविंद्र चावला ने 7 सितंबर 2013 को सीएमओ से इसका जवाब मांगा। बीके अस्पताल के पीएमओ की ओर से जवाब दिया गया कि निजी अस्पताल उनके पर्यवेक्षण या अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। इस पर चावला ने 10 नवंबर 2013 को राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की। पीएमओ की ओर से बताया गया कि निजी अस्पताल आरटीआई एक्ट के दायरे से बाहर हैं।
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हालांकि निजी अस्पतालों से इस संबंध में जानकारी मांगी गई, लेकिन किसी ने नहीं दी।  एक्ट की धाराओं का हवाला देने पर इसे लागू करवाने की जिम्मेदारी डीसी फरीदाबाद की होना बताया। आयोग ने डीसी फरीदाबाद विजय सिंह दहिया को 22 अक्तूबर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। डीसी ने 27 अक्तूबर को पीएमओ को पत्र लिख कर जवाब मांगा। आरटीआई कार्यकर्ता रविंद्र चावला ने बताया कि निजी अस्पतालों में सेल का गठन करने का अधिकारी किस अधिकारी का है, इसका निर्धारण ही नहीं हो सका है। उन्होंने बताया कि दो दिसंबर को राज्य सूचना आयुक्त वीडियो कांफ्रेंसिंग कर डीसी और पीएमओ से जानकारी लेंगे।

क्या कहते हैं जिम्मेदार
नए डीसी आने वाले हैं, इस संबंध में उनसे जानकारी लीजिएगा। वैसे भी आज संडे है और मैं छुट्टी पर हूं। यह सही है कि मामला मेरे कार्यकाल का है, लेकिन नए डीसी से सवाल कीजिएगा।
-विजय सिंह दहिया, जिला उपायुक्त फरीदाबाद।

निजी अस्पताल मेरे पर्यवेक्षण या अधिकार क्षेत्र में नहीं आते हैं। क्लीनिकल स्टैब्लिशमेंट एक्ट फिलहाल हरियाणा में लागू नहीं है। लागू होने के बाद ही हम निजी अस्पतालों का पर्यवेक्षण कर सकेंगे। जिला उपायुक्त किसी भी संस्था का निरीक्षण और पर्यवेक्षण कर सकते हैं।
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-गुलशन अरोड़ा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, फरीदाबाद
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