आज पूरा देश अपना 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। लोगों ने स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए अलग-अलग तरह से तैयारियां कर रखी है। सभी के मन में गजब का उत्साह भी है।
इस उत्साह को जानने के लिए अमर उजाला ने शहर के कई युवाओं से उनकी नजर में असली आजादी के मायने जाना चाहा तो युवाओं ने खुलकर अपने विचार शेयर किए। सभी ने मनमाफिक जीवन जीने, किसी भी काम में कोई व्यवधान न आने, शिक्षा में सुधार और रोजगार के अवसर पैदा करना असली आजादी बताया।
एनआईटी-5 निवासी एमबीए छात्रा जुही चावला कहती हैं कि देश की आजादी के 70 साल तो हो गए लेकिन अभी तक महिलाओं की सुरक्षा फुलप्रूफ नहीं हो पाई है। सरकार का लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना ही असली आजादी है।
बेशक लड़कियों ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत साबित की है। लेकिन कहीं न कहीं उनमें आज भी असुरक्षा की भावना रहती है। बगैर किसी रोक-टोक, बंदिशों से मुक्त और खुलापन असली आजादी है।
एनआईटी-2 निवासी रविकांत कहते हैं कि व्यक्ति को बगैर किसी रोकटोक के काम करने की आजादी होनी चाहिए। कानून के दायरे में रहकर काम करने की छूट, जीने और बोलने की खुली छूट ही असली आजादी है। सरकारी तंत्र द्वारा किसी काम में व्यवधान न पैदा करना असली आजादी है। क्योंकि आज का युवा किसी बंधन के दायरे में बंधना नहीं चाहता।
सेक्टर-10 निवासी कम्प्यूटर इंजीनियर गीतांजलि अरोड़ा कहती हैं कि जिस काम को करने में आपको खुशी हो, काम करने में किसी का हस्तक्षेप न हो वही आजादी है।
उनका कहना है कि आजादी के 70 साल में देश विभिन्न क्षेत्रों में तरक्की की है। आज महिलाएं देश की सीमाओं की रखवाली जैसे कठिन काम कर रही हैं। समाज में आया यही खुलापन ही असली आजादी है।
सेक्टर-10 निवासी एमबीए छात्रा शिवांगी कहती हैं कि समाज में काफी बदलाव आया है। पर अभी भी बहुत कुछ किया जाना है। युवाओं के भविष्य की चिंता कर शिक्षा में सुधार के जरिए रोजगार के अवसर पैदा करना ही असली आजादी का मायने है।