झील की जमीन कब्जाकर बसे बालाजी विहार में निगरानी करने वाले निगम अफसर खुद ही विकास कार्य करा रहे हैं। जिन अफसरों पर अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने इस अवैध बस्ती में नालियां, इंटरलाकिंग टाइल्स लगाकर सड़कें भी बनवा दी।
निगम अफसरों ने बिना टेंडर निकाले ही करीब आठ लाख के काम एक नेता के कहने पर करा दिए। ‘अमर उजाला’ ने मामले का खुलासा किया तो अफसरों और ठेकेदार में हड़कंप मच गया। अब अफसर मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं तो ठेकेदार काम छोड़ भागा।
हाईकोर्ट के आदेशों पर बालाजी विहार में सरकारी विभागों को भी विकास कार्य कराने की मनाही थी। लेकिन नगर निगम के निर्माण विभाग ने ही यहां नालियां और तीन गलियों में इंटरलाकिंग टाइल्स भी लगाने का काम शुरू करा दिया।
मामला तब खुला जब ‘अमर उजाला’ ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। अफसरों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में निर्माण कार्य बंद कर दिया गया। पहले नगर निगम अधिकारी विकास कार्य डूडा विभाग द्वारा कराए जाने की बात कहते रहे। हकीकत में निगम का निर्माण विभाग ही यहां विकास कार्य करा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक चुनाव से ठीक पहले एक नेता के कहने पर निगम ने बिना टेंडर यहां काम शुरू कराया था। वोटरों को खुश करने के लिए काम पहले और टेंडर प्रक्रिया बाद में पूरी की जानी थी।
डूडा ने निर्माण कराने से किया इनकार
डूडा के परियोजना अधिकारी इंद्रसेन सिंह ने बालाजी विहार में काम करने से इनकार किया है। उन्होंने बुधवार को डीएम कार्यालय को लिखित पत्र भेजकर स्थिति स्पष्ट कर दी। उनका कहना है कि पूर्व में डूडा ने अर्थला में काम कराए, लेकिन वह झील के खसरा नंबरों से अलग है।